जानिए आसियान के दस विशिष्ट अतिथियों के बारे में

नई दिल्ली : कल हमारा देश गणतंत्र दिवस की एक और सालगिरह पहली बार आसियान के दस विशिष्ट अतिथियों के साथ मनाएगा . इसलिए यह कई अर्थों में खास होगा. ये अतिथि कल राजपथ पर होने वाली परेड के दौरान भारत की सैन्‍य ताकत और सांस्‍कृतिक विविधता के साक्षी बनेंगे. भारत ने परंपराओं से अलग हटकर 10 देशों के नेताओं और राष्‍ट्राध्‍यक्षों को आमंत्रित किया है.

आपको बता दें कि गणतंत्र दिवस समारोह के पहले अतिथि गुयेन शुआन फुक वियतनाम के प्रधानमंत्री हैं. वह कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ऑफ वियतनाम के महासचिव भी हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री पद 2016 में संभाला . उनके नेतृत्‍व में वियतनाम भारत के 'एक्‍ट ईस्‍ट पॉलिसी' के प्रमुख स्तम्भों में से एक हैं. वियतनाम के साथ भारत के संबंध मधुर हैं, जबकि दूसरे अतिथि मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक देश में अरबों डॉलर के घोटाले में फंसे हैं. विरोध-प्रदर्शनों के बीच बेपरवाह नजीब ने चीन की तरफ मदद के लिए हाथ बढ़ाया है.जो भारत के लिए चिंता का विषय है. तीसरी अतिथि आंग सान सू की यूं तो म्‍यांमार की स्‍टेट काउंसलर हैं,लेकिन देश की सरकारी शक्तियां उनके ही पास है .अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्‍यों की लड़ाई लड़ने वाली के रूप में पहचानी जाने वाली सू की रोहिंग्‍या मुसलमानों के पलायन से वे आलोचनाओं से घिर गई .चौथे अतिथि लोकतांत्रिक देश इंडोनेशिया के राष्‍ट्रपति जोको विडोडो हैं , जो राष्‍ट्रपति बनने से पहले  जकार्ता के मेयर थे.आसियान नेताओं में वे सर्वाधिक जादुई व्‍यक्तित्‍व वाले माने जाते हैं .जबकि पांचवें अतिथि लाओस के प्रधानमंत्री थॉन्‍गलॉन सिसौलिथ हैं, जिन्होंने फरवरी 2016 में पद संभाला.. कंबोडिया की तरह लाओस भी चीन के गहरे प्रभाव में है.

बता दें कि छठे अतिथि फिलीपींस के राष्‍ट्रपति रॉड्रिगो दुर्तेते ने ड्रग्‍स तस्‍करों को लेकर दिए बयानों से खूब सुर्खियां बटोरी. उन्होंने ड्रग्‍स तस्‍करों को बिना किसी सुनवाई के सीधे मार डालने के आदेश तक दे दिए. जबकि सातवें अतिथि कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन 1985 से ही देश के प्रधानमंत्री हैं. उन पर लोकतांत्रिक मूल्‍यों को ताक पर रखने और मानवाधिकारों को लेकर हमेशा अलोचनाओं के केंद्र में रहे हैं.आठवें अतिथि प्रयुत चान ओचा थाईलैंड के प्रधानमंत्री हैं. उन्‍होंने 2014 में सैन्‍य विद्रोह के जरिये सत्‍ता पाई . उन्‍होंने देश की अर्थव्‍यवस्‍था को पटरी पर लाने की कोशिश की, चीन के साथ बढ़ती नजदीकियों ने कई सवाल भी खड़े किए.वे हर बार चुनाव को टालते रहे . नौवें अतिथि ब्रुनेई के सुल्‍तान हसनाल बोलकिया हैं ,उनकी  गिनती दुनिया के अमीर व्‍यक्तियों में होती है. मुख्‍य रूप से ब्रुनेई के तेल व खनिज भंडार उनकी आय के स्रोत हैं. वह ब्रुनेई की सरकार के प्रमुख हैं. वे स्‍वेच्‍छाचारी शासक हैं .जबकि दसवें अतिथि सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली हसीन लुंग हैं , जो देश की प्रगति के मुख्‍य समर्थक हैं. सिंगापुर के लोग उनकी नुमाइंदगी में नई चीजें सीख कर नए कौशल का विकास कर रहे हैं.

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