कब तक जम्मू-कश्मीर के लोग, पुलिसकर्मी और युवा देते रहेंगे अपनी जान की कुर्बानी: महबूबा मुफ्ती

जम्मू: जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमलों में 3 जवानों के शहीद होने के एक दिन पश्चात् शनिवार यानी 20 फरवरी को राज्य की पूर्व सीएम एवं PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती कश्मीर में अनंतनाग शहर के लोगरीपोरा ऐशमुकाम क्षेत्र में स्थित शहीद कांस्टेबल सुहैल अहमद के घर गईं तथा उनके परिवार से भेंट की। शहीद कांस्टेबल सुहैल अहमद के परिवार से भेंट करने के पश्चात् महबूबा मुफ्ती ने बताया, ‘भारत सरकार को सोचना चाहिए कि कब तक जम्मू कश्मीर के नागरिक ऐसे कुर्बान होते रहेंगे। यह एक बड़ी परेशानी है। इसका हल निकाला जाना चाहिए जिससे राज्य में जो खूनखराबा हो रहा है वो बंद हो तथा यहां की जनता अमन एवं चैन से रह सकें। यहां के कब्रिस्तान भर गए हैं। इस मुद्दे का हल निकालने के लिए केंद्र की भाजपा सरकार को पाकिस्तान के साथ चर्चा की पहल करनी चाहिए’।

महबूबा मुफ्ती ने केंद्र शासित राज्य में हिंसा नहीं हो यह निर्धारित करने के लिए स्थानीय जनता को भी चर्चा में सम्मिलित करने की मांग की है। शहीद कांस्टेबल अहमद जम्मू-कश्मीर पुलिस में कांस्टेबल थे तथा श्रीनगर शहर के बाघाट क्षेत्र में शुक्रवार को हुए आतंकवादी हमले में वे शहीद हो गए। वही इस आतंकी हमले में अहमद के अतिरिक्त एक और पुलिसकर्मी भी शहीद हुए थे। जबकि बडगाम शहर में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में एक पुलिसकर्मी की जान चली गई। दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले स्थित बडगाम में हुए मुठभेड़ में तीन दहशतगर्द भी मारे गए।

शहीद कांस्टेबल के परिवार से मिलने के पश्चात् रिपोटर्स से चर्चा में महबूबा ने केंद्र सरकार से पाकिस्तान तथा जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ चर्चा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ‘सरकार को यह सोचना चाहिए कि आखिकार कब तक जम्मू-कश्मीर की जनता, पुलिसकर्मी तथा युवा अपनी जान देते रहेंगे’।

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