अफगानिस्तान में भारत ने फिर जमा लिए पैर, तालिबान और पाकिस्तान के टकराव से 'हिन्द' को फायदा

काबुल: तालिबान द्वारा कब्ज़ा किए जाने के बाद अफगानिस्तान में दोबारा पैर रखने में विश्व के अधिकतर देश घबरा रहे हैं। हालांकि, भारत ने एक बार फिर अफगानिस्तान में अपने पैर जमा लिए हैं। जापान ने भी अफगानिस्तान में दोबारा अपना दूतावास आरंभ करने से पहले भारत से ही वहां के हालातों का जायजा लिया है। अक्टूबर में जापान ने अपना दूतावास पुनः खोल दिया है। इसके पीछे भारत द्वारा दी गई जानकारी की अहम भूमिका है। बता दें कि, अफगानिस्तान में तालिबान के हमले शुरू होने के बाद भारत ने अपने सभी लोगों को वापस बुला लिया था।  

दरअसल, तालिबान के कब्जे के बाद भारत को भी अंदेशा था कि अब पाकिस्तान का वर्चस्व अफगानिस्तान में बढ़ जाएगा और इससे भारत की रणनीतिक साझेदारी पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। पाकिस्तान के तत्कालीन ISI प्रमुख फैज हमीद 2021 में तालिबानी सरकार बनवाने में सहायता करने काबुल पहुंचे थे। मगर, एक साल बाद ही स्थिति पूरी तरह से उल्टी हो गई है। क्योंकि अब तालिबान और पाकिस्तानी फ़ौज के बीच ही ठन गई है। तालिबान ने दुरांद लाइन को इंटरनेशनल बॉर्डर मानने से साफ मना कर दिया है। दूसरी ओर पाकिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने एक बार फिर सीजफायर ना मानने की घोषणा कर दी है। अफगानिस्तान में TTP के 4 हजार से अधिक लड़ाके हैं। 

दरअसल, पाकिस्तान को उम्मीद थी कि अफगान तालिबान TTP को पाकिस्तान के साथ शांति समझौते करने के लिए मना लेगा। मगर, TTP ने बलूचिस्तान में 30 नवंबर को सेना और सरकारी कर्मचारियों पर हमला करके तीन लोगों की हत्या कर दी थी। TTP ने दावा किया है कि उसने एक साल के भीतर पाकिस्तान में 267 हमले किए हैं। अफगानिस्तान पर तालिबान के कंट्रोल के बाद पाकिस्तान में आतंकी हमले दोगुना हो गए हैं। 

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