Yes Bank: हर डूबने वाले को Yes-Yes कहता गया बैंक... और खुद डूब गया

देश का चौथा सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक जो अपनी औसत से अधिक ब्याज देने के लिए मशहूर था, आज वो दिवालिया हो गया है। हम बात कर रहे है Yes Bank की जिसका नियंत्रण अब RBI के हाथ में हैं और पिछली रात से ही इस बैंक के ग्राहक परेशान हैं। 2004 में शुरू हुआ यह बैंक अचानक चर्चा के केंद्र में आया। नवंबर 2005 में यस बैंक के फाउंडर राणा कपूर को एन्‍टरप्रन्‍योर ऑफ द ईयर अवार्ड मिला। मार्च 2006 में बैंक ने अपना पहले वित्‍त वर्ष के परिणाम घोषित किए।

इस दौरान बैंक का लाभ 55.3 करोड़ रुपये जबकि रिटर्न ऑफ एसेट (ROA) 2 फीसदी रहा। 2009 में मुंबई में हुए 26-11 के आतंकी हमलों में बैंक के प्रमोटर अशोक कपूर का निधन हो गया। जो बैंक के CEO राणा कपूर के रिश्तेदार और बिज़नेस पार्टनर भी थे। इसके बाद बैंक के मालिकाना हक को लेकर अशोक कपूर की पत्नी मधु कपूर और राणा कपूर के बीच खींचतान होने लगी। इसी दौरान RBI को भी यह महसूस हुआ कि यस बैंक अपनी बैलेंस शीट की सही जानकारी नहीं दे रहा है और अपने डूबे हुए कर्ज (NPA) और बैलेंसशीट में कुछ गड़बड़ी कर रहा है। परिणामस्वरूप आरबीआई ने यस बैंक के चेयरमैन राणा कपूर को जबरदस्ती पद से हटा दिया। दरअसल यस बैंक कुछ ऐसी कंपनियों को लोन दे रहा था, जिन्हे कोई भी बैंक कर्ज देने के लिए राजी नहीं था।

इसमें एलएंडएफएस, दीवान हाउसिंग, जेट एयरवेज, कॉक्स एंड किंग्स, सीजी पावर और कैफे कॉफी डे जैसी कंपनियों का नाम सामने आया। इस वजह से बैंक का NPA बढ़ने लगा, जिसके कारण RBI को इसमें दखल देना पड़ा और 1400 की शेयर प्राइज वाला बैंक आज 16 रुपए पर आ गया। फिलहाल RBI  ने बैंक के ग्राहकों पर 50 हज़ार से अधिक की निकासी पर प्रतिबंध लगा दिया है । हालांकि सरकार ने ग्राहकों को भरोसा दिलाया है कि उनका पैसा डूबने नहीं दिया जाएगा और जल्द इसका कोई समाधान निकल लिया जाएगा।

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