32 साल बाद जगी इन्साफ की आस, कश्मीरी हिन्दुओं का दर्द सुनने को राजी हुआ सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार की SIT जांच की मांग करने वाली ‘रूट्स इन कश्मीर’ की क्यूरेटिव याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय सुनवाई करने को तैयार हो गया है, 22 नवंबर को इस मामले की सुनवाई होगी। इससे पहले पुनर्विचार याचिका को 2017 में 27 वर्षों की देरी से दाखिल किए जाने के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया था। इस याचिका में कहा गया है कि मानवता के खिलाफ हुए अपराधों के मामले में कार्यवाही करने की कोई समय सीमा निर्धारित नहीं होती।

तीन न्यायमूर्तियों की बेंच की अगुवाई प्रधान न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ करेंगे। बेंच में अन्य जज न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर हैं। इसके अलावा एक और सरकारी सामाजिक संगठन (NGO) वी द सिटीजन ने भी जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है। इसमें कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार के विस्थापितों के पुनर्वास की भी मांग की गई थी। बता दें कि, कुछ महीनों पहले कश्मीरी फाइल्स नामक एक फिल्म रिलीज हुई थी। इस फिल्म के आने के बाद लोगों में जबरदस्त आक्रोश था और आंखों में आंसू भी। 1989-90 के बीच कश्मीरी हिन्दुओं को उनके ही घर से जबरन बेघर कर दिया गया था। हिन्दू महिलाओं के साथ इस्लामी आतंकियों ने बर्बर बलात्कार किए थे और कई लोगों की हत्या के बाद हिन्दू वहां से पलायन कर गए थे।

बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट में एक के बाद एक कई याचिकाएं दाखिल करते हुए मांग की गई है कि कश्मीरी पंडितों के साथ जो कुछ हुआ उसकी फाइलों को वापस खोला जाए। शीर्ष अदालत ने ‘रूट्स इन कश्मीर’ की क्यूरेटिव याचिका पर 22 नवंबर को सुनवाई करने का निर्णय लिया है। इससे पहले सितंबर के पहले हफ्ते में जम्मू कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार मामले में सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई थी। अदालत ने याचिकाकर्ता NGO वी द सिटीजंस को केंद्र सरकार के समक्ष रिप्रेजेंटेशन देने के लिए कहा था।

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