महाकाल मंदिर में उड़ा पूर्व वॉलीबाल खिलाड़ी का मजाक

नई दिल्‍ली: राष्ट्रीय स्तर की पूर्व वॉलीबाल खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा के साथ उज्जैन के महाकाल मंदिर में ऐसा मजाक हुआ कि उन्हें यहां तक कहना पड़ गया कि मेरी विकलांगता का मजाक उड़ाया गया है. बता दे कि एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा फहरा चुकीं जानी-मानी पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा को महाकाल का दर्शन हिमालय पर चढ़ने से भी कठिन साबित हुआ. हालांकि इस कठिनाई के बाद भी वो गर्भ गृह जाकर भगवन शिव के दर्शन नहीं कर सकीं. 

अरुणिमा सिन्हा ने अपने ट्वीट में कहा है कि मुझे आपको यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि मुझे दर्शन करने में एवरेस्ट पर चढ़ने से भी अधिक दर्द हुआ. वहां पर मेरी विकलांगता का मजाक उड़ाया गया है. 

उन्होंने बताया कि मैं दो अन्य लोगों के साथ रविवार तड़के साढ़े चार बजे मंदिर पहुंची. राज्य की एक मंत्री के मेहमान के रूप में नाम दर्ज होने के कारण उम्मीद थी अच्छे से दर्शन हो जाएंगे. मगर उन्हें एलईडी स्क्रीन पर भस्मारती देखनी पड़ी और तो और गर्भगृह के दर्शन के लिए जाने के दौरान भी उन्हें सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया. परिचय और दिव्यांग होने के बारे में बताने पर भी वे नहीं माने. काफी देर तक बहस के बाद अकेले ही जाने की अनुमति दी. 

वहीं महाकाल मंदिर के प्रशासक अवधेश शर्मा ने कहा कि उन्हें इस घटना के बारे में मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला. उन्होंने कहा कि अरुणिमा ने पुलिस या मंदिर प्रशासन के पास कोई शिकायत नहीं दर्ज कराई है. उन्होंने आगे कहा कि यहां पर दिव्यांग लोगों के लिए एक रैंप है और मैं सुरक्षाकर्मियों से पूछूंगा कि उन्होंने सिन्हा को क्यों रोका? इसके साथ ही हम सीसीटीवी फूटेज की जांच करके दोषियों का पता लगाएंगे.

आपको बता दे कि अप्रैल, 2011 में एक ट्रेन यात्रा के दौरान लुटेरों ने उन्हें चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया जिसमें उन्होंने घुटने के नीचे से अपना एक पैर गवां दिया। इसके दो साल बाद उन्होंने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया और देश की पहली दिव्यांग पर्वतारोही बन गईं जिसने एवरेस्ट फतह किया है।

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