आज भी इस जगह पर मिलते है हनुमान जी के साक्ष्य

 

आज के समय में सबसे अधिक हनुमान जी को पूजा जाता है. माना जाता है कि हनुमान जी कलयुग में भी पृथ्वी पर मौजूद है, वह हर उस स्थान पर मौजूद होते है, जहां भगवान राम का भजन व सुन्दर कांड का पाठ किया जाता है. आज भी हनुमान जी के पृथ्वी पर होने के कई साक्ष्य मिलते है, जिसे जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे. आज भी श्रीलंका में एक ऐसा आदिवासी कबीला है, जहां हनुमान जी साक्षात मिलने आते है. माना जाता है कि इस कबीले का संबंध विभीषण से है, इस बात की जानकारी वैज्ञानिक शोध से प्राप्त हुई है.

शास्त्रों में हनुमान जी का निवास स्थान गंधमादन पर्वत बताया गया है, आज भी हनुमान जी के इस पर्वत पर होने के कई साक्ष्य मौजूद है. इस विषय में यहां तप करने वाले साधू-संतो से मिलने वाली जानकारी को सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगे. महाभारत काल में भी हनुमान जी ने भीम का अहंकार तोड़ा था व महाभारत युद्ध में वह अर्जुन के रथ पर लगी ध्वजा में विराजमान थे. आज वैज्ञानिकों के द्वारा पृथ्वी से सूर्य की जो दूरी बताई जाती है, वही दूरी पूर्व में ही हनुमान चालीसा की पंक्ति “जुग सहस्त्र जोजन पर भानु. लील्यो ताहि मधुर फल जानू.” के द्वारा बतायी जा चुकी है.

रामायण के अनुसार लक्ष्मण को शक्ति बाण लगने पर उनके उपचार के लिए जिस संजीवनी बूटी की आवश्यकता थी. वह केवल हिमालय पर्वत पर मिलती थी. जिसे लाने के लिए हनुमान जी हिमालय पर्वत गए थे, व बूटी की जानकारी न होने के कारण वह पर्वत के उस टुकड़े को ही लंका ले गए थे. जिसपर संवीवनी बूटी मौजूद थी. आज भी वह पर्वत श्रीलंका में स्थित है, जो हिमालय के पर्वत के ही समान है.

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