नोटबन्दी का सकारात्मक असर, एक माह में 469 माओवादियों ने किया समर्पण

नई दिल्ली : एक ओर जहां नोटबन्दी को मुद्दा बनाकर विपक्ष विरोध प्रदर्शन कर रहा है, वहीँ दूसरी ओर इस नोटबन्दी के सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे हैं.माओवाद प्रभावित राज्यों में सरकार की नीति सुरक्षाबलों की तरफ से दबाव बनाने के अलावा यहां नोटबन्दी का पूरे क्षेत्र में व्यापक असर देखने को मिल रहा है.पिछले 28 दिनों में अब तक कुल 469 माओवादी और उनके समर्थकों ने समर्पण कर दिया है. एक महीने के अंदर इतनी बड़ी संख्या में माओवादियों का समर्पण करना एक कीर्तिमान है.

गौतरलब है कि माओवादियों पर कार्रवाई में सीआरपीएफ के साथ छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में स्थानीय पुलिस की अहम भूमिका रही है, लेकिन इसमें नोटबन्दी के योगदान को नहीं भुलाया जा सकता. अचानक हुई नोटबन्दी ने माओवादियों की कमर तोड़ दी है.रही सही कसर छोटे नोटों की कमी ने पूरी कर दी.ऐसे हालातों में माओवादियों ने समर्पण करना ही मुनासिब समझा क्योंकि उन्हें रुपयों के अभाव में रोजमर्रा के खर्चों की पूर्ति करने भी परेशानी आ रही थी.

इस बारे में सम्बन्धित अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार नोटबन्दी की घोषणा वाले रात 8 नवम्बर के बाद से 564 में से 469 माओवादी और उनके समर्थकों ने समर्पण कर दिया है. खास बात यह ह कि सरेंडर करनेवाले माओवादियों में सत्तर फीसदी ओडिशा के मल्कानगिरी के हैं.

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