पीएम से कई गुना अधिक वेतन पाते हैं इन राज्यों के सीएम

संघीय शासन व्यवस्था में पीएम अधिक शक्ति संपन्न माना जाता है। वो देश का लीडर होता है, वो लीडर, जिसकी गवर्मेंट देश को चलाती है, नीतियां बनाती है तथा आवश्यकता पड़ने पर प्रदेशों के केस में सलाह देती है या दखलंदाजी भी कर सकती है। हालांकि अधिकारों के हिसाब से एक सीएम अपने प्रदेश का सबसे शक्तिसंपन्न लीडर होता है, जो प्रदेश की सरकार का चीफ होता है। सामान्य रूप से व्यक्तियों का मानना होता है कि पुरे भारत में सबसे अधिक वेतन राष्ट्रपति का होता है। उसके पश्चात् पीएम का नंबर आता है। किन्तु ऐसा नहीं है। कई प्रदेशों के सीएम का वेतन प्रधानमंत्री से अधिक है। बेशक ये बात चौंका देने वाली हो किन्तु सच है।

कुछ प्रदेशों के सीएम भारत के पीएम से कहीं अधिक सैलरी पाते हैं, जी हां! ढाई गुने से भी अधिक तक। वही जब भारत आजाद हुआ तब पीएम के वेतन को लेकर तय नहीं था। जब नेहरू भारत के पीएम बने तो बड़ा मुद्दा ये था कि उनका वेतन क्या होगा। इस बारे में नेहरू ने कभी कोई पहल स्वयं से नहीं की। हालांकि उनकी मंत्रीमंडल के कई मंत्रियों को लगता था कि जिस प्रकार ब्रिटेन का पीएम अपने मंत्रीमंडल मंत्रियों की अपेक्षा में दोगुनी सैलरी तथा अन्य सुविधाएं पाता है, वैसा ही देश में भी होना चाहिए।

वही तेलंगाना प्रदेश के सीएम का वेतन 4 लाख 10 हज़ार रुपये प्रतिमाह है। मुख्यमंत्रियों के वेतन की सूचि में ये सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसके पश्चात् दिल्ली के मुख्यमंत्री का नंबर है, इनका वेतन 3 लाख 90 हज़ार रुपये है। गुजरात के मुख्यमंत्री कि सैलरी 3।21 लाख रुपये प्रतिमाह है। यूपी, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश तथा हिमाचल प्रदेश के सीएम कि सैलरी 3 लाख रुपये प्रतिमाह से अधिक है। मुख्यमंत्री के वेतन के लिहाज़ से इन प्रदेशों को शीर्ष 7 कहा जा सकता है। इसी के साथ ये सीएम सबसे ज्यादा वेतन पाते है।

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