10 वर्षीय बच्ची को रूम में ले गई वार्डन, निजी अंगों से की छेड़छाड़, बनाया Video

चंडीगढ़: चंडीगढ़ के एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने एक खेल एकेडमी में 10 वर्षीय बच्ची का यौन उत्पीड़न करने वाली गर्ल्स हॉस्टल की वार्डन को 12 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. मामले में पीड़िता के पिता ने बताया था कि 8 अगस्त, 2018 को उन्हें उनकी बेटी ने उन्हें फोन किया था. फोन पर उनकी बेटी ने कहा था कि हॉस्टल वार्डन उसे एक रूम में ले गई, और उसे गलत तरीके से छूते हुए एक वीडियो रिकॉर्ड किया है.

अगले दिन जब पिता अपनी बेटी से मिलने के लिए पहुंचे, तो उसने बताया कि वार्डन उसे फिर से एक रूम में ले गई थी, और उसके निजी अंग को छुआ. शिकायत के आधार पर, महिला छात्रावास वार्डन को अरेस्ट किया गया और सेक्टर 19 पुलिस स्टेशन में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम की धारा 6 और 10 के तहत केस दर्ज किया गया. सजा सुनाए जाने के दौरान आरोपी महिला ने नरमी बरतने की गुहार लगाई, क्योंकि उसका कोई पहले का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और उसे बिस्तर पर पड़ी अपनी सास की देखभाल भी करनी थी.

हालांकि, कोर्ट ने कहा कि, यह मामला हमारे सम्मानित, समृद्ध और पारंपरिक समाज के मूल्यों के पतन का एक उपयुक्त उदाहरण है. जिसमें एक हॉस्टल वार्डन होने के नाते आरोपी को नाबालिग पीड़ित लड़की पर यौन उत्पीड़न करने का दोषी ठहराया जाता है. उसने न सिर्फ नाबालिग पीड़िता के साथ जघन्य अपराध किया है, बल्कि नाबालिग के माता-पिता ने उस पर जो विश्वास किया था, उसे तोड़ा है. 

कोर्ट ने कहा कि दोषी को 12 वर्ष के कठोर कारावास और 30,000 रुपये के जुर्माने की सजा भुगतनी होगी. जुर्माने का भुगतान नहीं करने की स्थिति में उसे छह माह का और कठोर कारावास भुगतना होगा. अदालत ने कहा कि, यह मामला ये दर्शाता है कि किस प्रकार से हमारे समाज के मूल्य कम हो रहे हैं. महिला ने न सिर्फ एक नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न किया है, बल्कि उस पर एक वार्डन के नाते जो पीड़िता के माता पिता ने भरोसा किया था, उसे भी तोड़ा है.

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