'व्हेल के पेनिस' से की जलियांवाला बाग स्मारक की तुलना, भारत के प्रति घृणा से भरी हुई है ये कैम्ब्रिज की प्रोफेसर

नई दिल्ली: भारतीय मूल की प्रोफेसर प्रियंवदा गोपाल को उनके द्वारा सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों के लिए कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। वह एक अमेरिकी लिबरल हैं, जो हिंदुओं के लिए घृणित बयानों के चलते पहले भी विवादों में रह चुकी हैं। वह कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में उत्तर औपनिवेशिक स्टडीज की प्रोफेसर हैं। 31 अगस्त को प्रियंवदा गोपाल ने शहीदों के प्रतीक जलियांवाला बाग स्मारक की तुलना ‘व्हेल के लिंग’ (‘whale penis’) से की। 

दरअसल ट्विटर पर एक यूज़र ने स्मारक के सौंदर्यशास्त्र को स्वीकार न करने की बात कही थी। जिसके बाग प्रियंवदा ने उक्त कमेंट किया था। वैसे यह पहला मौका नहीं है, जब प्रोफेसर प्रियंवदा गोपाल ने सोशल मीडिया पर इस तरह की आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की हैं। 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के पास होने के दौरान प्रियंवदा गोपाल ने H-1B वीजा का उल्लेख करते हुए माँग की थी कि संयुक्त राज्य अमेरिका हिंदुओं के नागरिक बनाने की प्रक्रिया को ब्लॉक करे और ‘उनके कीमती H-1Bs को छीन ले’।

हाल ही में, प्रियंवदा गोपाल ने दावा किया था कि जाने माने विद्वान कोएनराड एल्स्ट ‘हिंदू वर्चस्ववाद के अनुयायी’ थे, जिसकी तुलना उन्होंने ‘आर्यन वर्चस्ववाद’ से की, जिसमें नाजी का प्रतीक है। बता दें कि प्रियंवदा गोपाल ‘व्हाइट लाइव्स डॉन्ट मैटर, ऐज व्हाइट लाइव्स’ (White lives don’t matter. As White lives) कहने के बाद विवादों में घिर गई थी। इसके लिए उन्हें कड़ी आलोचना झेलना पड़ी थी। इसके बाद उन्होंने फौरन एक ट्वीट करते हुए ‘ब्राह्मण-नस्ल को खत्म करने’ की माँग की थी।

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