UPSC में हर साल बाजी मारता है बिहार, फिर भी क्यों है बीमार?

पटना: बिहार... एक ऐसा राज्य जहाँ हुनर की कमी नहीं है, फिर चाहे वो किसी भी क्षेत्र में हो, वही सिविल सर्विस के रिजल्ट की बात करें तो हमेशा की तरह बिहार का योगदान जबर्दत रहा है. टॉप-10 में से 3 बिहार के हैं. UPSC दुनिया के सबसे मुश्किल इम्तेहानों में से माने जाते हैं, सिविल सेवा हो या IIT जैसे इम्तिहान, बिहार का योगदान बढ़ रहा है. लेकिन इन सबके बावजूद आखिर बिहार अभी तक पिछड़ा क्यों है? ये एक ऐसा सवाल है जो हर बिहारी के मन उठता है या यूँ कहें कि हर भारतीय इस सवाल में उलझा हुआ है कि आखिर क्यों?

वही एतिहासिक प्रमाण यह बताते हैं कि बिहार के जिला वैशाली में ही दुनिया के पहले गणतंत्र की स्थापना हुई थी। आज यह राज्य भारत के सभी राज्यों कि तुलना में लगभग हर चीज में पिछड़ा हुआ है। लचर शिक्षा व्यवस्था ने इस प्रदेश को बदहाल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। फिर भी यहाँ के छात्र अपनी लगन और मेहनत के बलबूते UPSC की परीक्षा में अपना परचम लहराते आए हैं। एक जमाने से सिविल सेवा में बिहार का बोलबाला रहा है। आपको यह जानकर हैरानी होगी के बिहार में 2.87 लाख व्यक्ति में से एक व्यक्ति IAS बनता है। वहीं देश में हर 12वां IAS अफसर बिहारी है। यदि आप इस समय कुल IAS कैडर की बात करेंगे तो लगभग 4964 में से 416 IAS अधिकारी बिहार से हैं। यह आंकड़े तब इतने अधिक हैं जब बीते 20 सालों में सिविल सेवा में बिहार का दबदबा कम हुआ है। 

क्या है बिहार के पिछड़ेपन की वजह? अपने नेताओं की गलत कार्यशैली ने बिहार को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। वहीं केंद्र सरकार की अनदेखी ने इस आग में घी का काम किया है। बिहार के पिछड़ेपन के कई वाजिब कारण है-

* जनसंख्या:- आप बिहार की जनसंख्या का अनुमान इस बात से लगा सकते हैं कि जब सरकार ने जनसंख्या पर नियंत्रण करने के लिए तमाम तरह के अभियान चलाए तो पूरे देश में प्रजनन दर में 23 फीसदी की गिरावट आई वहीं बिहार में यह गिरावट सिर्फ 7.8 फीसदी दर्ज की गई। चौथे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के मुताबिक, देश का प्रजनन दर 2.18 फीसदी और बिहार का 3.4 फीसदी है। बिहार में 42 फीसदी बच्चियों की शादी 18 वर्ष की उम्र से पहले हो जाती है। जनसंख्या का सबसे बड़ा दबाव मुलभूत सुविधाओं पर पड़ता है।

* कृषि पर निर्भर आर्थिक जीवन:-  बिहार की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है। परन्तु जनसंख्या के अनुपात में कृषि व्यवस्था बहुत ही पिछड़ी है। जोतों के बँटवारे की वजह से प्रति हेक्टेयर उत्पादन भी कम है जो आर्थिक पिछड़ेपन में सहायक है।

* प्राकृतिक आपदा:-  बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन में प्रकृति का भी एक खास योगदान है। उत्तरी बिहार की विनाशकारी बाढ़ प्रत्येक वर्ष भारी मात्रा में धन और जन को अपने लपेटे मे ले लेती है जिसका भार सम्पूर्ण बिहार को सहन करना पड़ता है। बाढ़ के बाद उत्पन्न सूखे की समस्या सम्पूर्ण बिहार को अपने चपेट में ले लेती है।

औद्योगिक पिछड़ापन:-  बिहार में उद्योग का विकास अल्प मात्रा में है जिससे प्रदेश को आय के साधन प्राप्त नहीं हो पाते हैं, लोगों को रोजगार नहीं मिल पाता है। फलत: पलायन की स्थिति बनी रहती है जिसका प्रभाव आर्थिक पिछड़ेपन पर पड़ता है।

बुनियादी सुविधाएं बिहार में स्वास्थ्य सुविधाओं का अनुमान लगाना है तो आप अप्रैल 2020 में सामने आई उस वीडियो को याद कीजिये जब एक माँ अपने 3 वर्षीय मृत बेटे के मुर्दा शरीर को लेकर तीन किलोमीटर से अधिक पैदल चली थी। नवजात शिशुओं की मौत के मामले में बिहार चौथे पायदान पर है। सड़क की हालत ऐसी है कि बिहार में सालाना लगभग 10 हजार सड़क दुर्घटना दर्ज की जाती है। बिहार की शिक्षा व्यवस्था को आप रूबी रॉय के टॉपर घोटाले से याद कर सकते हैं। बिहार का कोई भी विश्वविद्यालय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी टॉप विश्वविद्यालयों की सूची में सम्मिलित नहीं है।

अब सवाल ये उठता है कि अगर बिहार को लेकर अब भी सरकार गंभीर नहीं हुई तो वो दिन दूर नहीं जब Top-100 में सभी बिहारी भी हो जाएंगे, तब भी राज्य का कुछ भला ना होने वाला. बस हर साल रिजल्ट आने पर "एक बिहारी सब पर भारी" बोल कर खुद को संतुष्ट कर लीजिये. उससे ज्यादा कोई फायदा नहीं. हम सरकारों को दोष दे सकते हैं...लोगों की जातिवादी सोच को दोष दे सकते हैं, लालच की राजनीति को दोष दे दीजिये. मगर सच तो यही है कि बिहार अभी भी कहीं पीछे रह गया है.

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