त्वरित टिप्पणी: राजनीति के अजातशत्रु अटल...

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे। अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसे नेता थे, जिन्हें उनके विरोधी भी उतना ही सम्मान देते थे, जितना उनकी पार्टी के कार्यकर्ता। आपसी मतभेदों को दूर कर ​राजनीति के नए आयाम गढ़ने के महारथी अटल राजनीति के अजातशत्रु थे। उनके निधन से भारतीय राजनीति के एक युग का अंत हो गया।  अटल बिहारी वाजपेयी को हमेशा बिना किसी मतभेद के राजनीतिक दलों को जोड़कर रखने और अपने अटल विश्वास और कर्मठता के साथ देश को आगे बढ़ाने के लिए याद ​किया जाएगा। आज जब राजनेता निम्न स्तर की राजनीति कर रहे हैं। सत्ता पाने के लालच में एक—दूसरे पर झूठे और मनगढंत आरोप—प्रत्यारोप लगा रहे हैं, ऐसे में अटल जी का व्यक्तित्व उनके लिए एक मिसाल साबित हो सकता है। अटल जी ऐसे राजनेता थे, जिन्होंने कभी भी किसी राजनेता या विपक्ष पर घिनौना आरोप नहीं लगाया। बल्कि कई बार विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने सत्ता पक्ष के अच्छे कार्यों की तारीफ भी की और सत्ता में रहते हुए विपक्ष को सराहा। कहा जाता है कि 1971 के भारत—पाक के युद्ध के समय भारत की सफलता के लिए उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को दुर्गा की उपाधि दे दी थी।  अटल जी उन राजनेताओं में से थे, जो गलत करने पर अपनी ही पार्टी के नेताओं के खिलाफ भी जा सकते थे। जब गुजरात दंगे हुए थे, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस समय गुजरात के  मुख्यमंत्री थे। अटल जी चाहते थे कि नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दें। हालांकि आडवाणी ने उन्हें ऐसा करने से रोक लिया था। वहीं कई बार अपने निर्णयों के कारण वह बीजेपी में अलग—थलग भी पड़े, लेकिन उन्होंने कभी भी अपना सिर नहीं झुकाया। आज अटल ही हमारे बीच नहीं हैं, मगर उनका जीवन हमें हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। 

जानकारी और भी

पहली बार सिर्फ 13 दिनों के लिए प्रधानमंत्री बने थे अटल, जाने उनसे जुडी 10 अनसुनी बातें

...जब अटलजी को हराने के लिए कांग्रेस ने लिया था कॉमेडियन का सहारा

अटल जी के निधन पर राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर पीएम मोदी ने जताया दुःख

Related News