रहस्यमई है इन 12 दरवाजों की कहानी

कहते हैं कि एक राजा अगर अपनी रानी से सच्चा प्रेम करे तो वो अपनी रानी के लिए कुछ भी कर सकता है. इतिहास के पन्नों में राजा और रानी के प्रेम की कई कहानियां है पर कुछ प्रेम कहानियां ऐसी हैं जिन्हें पढ़ने के बाद लोग हैरत में आ जाते हैं. आपने कभी राजा बाज बहादुर का नाम सुना है? शायद नहीं सुना होगा पर राजा बाज बहादुर के नाम से ज्यादा चर्चा में उनकी रानी थीं जिनका नाम रूपमती था. राजा बाज बहादुर की रानी का नाम तो रूपमती था ही पर साथ ही वो वास्तव में रूपमती जैसी प्रतीत होती थीं. राजा बाज बहादुर रानी रूपमती से इतना प्यार करते थे कि वो रानी रूपमती के लिए कुछ भी करने को तैयार थे. कहते हैं कि हसीन वादियों में बहुत से राज छिपे होते हैं. ऐसी ही एक जगह हसीन वादियों से घिरी हुई है जिसका नाम मांडू है. मांडू बेहद ही खूबसूरत जगह है और जो भी व्यक्ति मांडू घूमने के लिए जाता है वो वहीं का होकर रह जाता है. मांडू इंदौर से करीब 110 किमी दूर विंध्याचल की पहाडिय़ों में करीब 2000 फीट की ऊंचाई पर म.प्र. के धार जिले में बसा हुआ है. पर मांडू की जो सबसे खास बात है वो यहां का किला है जिसका नाम रानी रूपमती का किला है. रानी रूपमती का किला राजा बाज बहादुर और रानी रूपमती के प्यार का साक्षी है.

रानी रूपमती को राजा बाज बहादुर इतना प्यार करते थे कि रानी रूपमती के बिना कुछ कहे ही वो उनके दिल की बात को समझ जाते थे. राजा बाज बहादुर और रानी रूपमती के प्यार के साक्षी मांडू में 3500 फीट की ऊंचाई पर बना रानी रुपमती का किला है. कहते हैं कि रानी रूपमती नर्मदा नदी को देखे बिना भोजन ग्रहण नहीं करती थीं. इसलिए राजा बाज बहादुर ने रानी रूपमती की इच्छा का ध्यान रखते हुए रानी रूपमती किले का निर्माण करवाया. रानी रूपमती के किले से नर्मदा नदी नजर आती है. कहा जाता है कि रानी रूपमती प्रतिदिन स्नान के बाद यहां पहुंचतीं और नर्मदा जी के दर्शन उपरांत अन्न ग्रहण करती थीं.

कहते हैं कि शायद ही दुनिया में ऐसी कोई खूबसूरत जगह नहीं थी जहां शाहजहां की नजर नहीं पड़ी थी. रानी रूपमती के किले से मांडू जगह की सारी खूबसूरत वादियां नजर आती थीं और वो खूबसूरत वादियां ऐसी थीं कि जो रानी रूपमती की सुन्दरता को और बढ़ा देती थीं. शाहजहां भी मांडू की हसीन वादियों के कायल थे पर मांडू की हसीन वादियों को देखना इतना आसान नहीं था क्योंकि मांडू की हसीन वादियों को देखने के लिए 12 दरवाजों से होकर जाना पड़ता था और वो दरवाजे कोई आम दरवाजे नहीं थे. उन 12 दरवाजों की खासियत यह थी कि उन दरवाजों को पार करने की दूरी अत्यधिक होती थी. मांडू जगह की खूबसूरती को देखने के लिए जो पहला दरवाजा पार करना पड़ता था उस दरवाजे को दिल्ली कहा जाता था.

राजा बाज बहादुर रानी रूपमती को बेहद ही प्यार करते थे शायद इसलिए रानी रूपमती के महल तक पहुंचने से पहले राजा बाज बहादुर के महल को पार करना होता था. राजा बाज बहादुर रानी रूपमती की रक्षा के लिए यह सब करते थे इसलिए शायद आज भी रानी रूपमती के किले को राजा बाज बहादुर और रानी रूपमती की प्रेम कहानी का प्रतीक समझा जाता है.

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