ज़िंदगी में जो छू कर गुज़र गया

tyle="text-align: justify;">एहसास ज़िंदगी में जो छू कर गुज़र गया ।
मेरे लिए बहुत बड़ा वो काम कर गया ॥
तेरे बग़ैर जी सकूँ कोशिश में हूँ ज़रूर।
वर्ना वुजूद तो मेरे भीतर का मर गया ॥
हम सूफ़ियाना दिल लिए बचते रहे मगर ।
उनकी नज़र का तीर था दिल में उतर गया ॥
साये के पीछे भाग कर मुझको न कुछ मिला ।
ओझल निगाह से हुआ जाने किधर गया ॥
फ़रमाइशों पे आज फिर बच्चों को डाँट दी ।
जब ले के खाली जेब मैं दफ़्तर से घर गया ॥
शर्म-ओ-हया तो ताक़ पे रख दी है उसने आज ।
लगता है उसकी आँख का पानी उतर गया ॥
कोई नहीं है आर्ज़ू कोई न जुस्तजू।
'सैनी'किसी के प्यार में हद से बिखर गया...

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