इस लाइलाज बीमारी की दांतों से कर सकते है पहचान

इस लाइलाज बीमारी की दांतों से कर सकते है पहचान

एक नया अध्ययन में यह खुलासा हुआ कि बीते दशको में किसी भी बीमारी के लक्षण की पहचान दांतो की मदद से की जाती थी. बता दें कि न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी अमायोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस की पहचान दांतों की मदद की जा सकती हैं.

ALS, जिसे Lou Gehrig’s रोग के रूप में भी जाना जाता है, एक विनाशकारी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है. जिसका कोई इलाज नहीं है. अल्जाइमर और पार्किंसंस के बाद, एएलएस तीसरा सबसे आम न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग है. आमतौर पर यह 60 वर्ष की आयु में लोगों में नजर आता है. 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस बीमारी की वजह आमतौर पर आनुवांशिक और पर्यावरणीय कारकों को माना जाता है. बता दें कि नए अध्ययन के नतीजे बताते है कि, एएलएस से जुड़े न्यूरोडेनेरेशन धीरे-धीरे शुरू हो सकते हैं, और दशकों पहले इसके लक्षण नजर आने लगते हैं. वही, इन रोगों के प्रारंभिक विकास में धातु डाइस्फोमोस्टेसिस प्रक्रिया अहम भूमिका निभा सकती है. बता दे कि तांबा, जस्ता और लोहे जैसी कई धातुएं स्वाभाविक रूप से मस्तिष्क में पाई जाती है. अगर शरीर के सामान्य होमोस्टैटिक तंत्र सही ढंग से काम नहीं कर रहा हो तो, इन धातुओं स्तर उंचा होकर धीरे-धीरे मस्तिष्क में जमा हो सकता है.

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