ये कैसी चुभन हो रही है

जाने ये कैसी चुभन हो रही है।
बिना दर्द के आँख क्यों रो रही है।।
ख्यालों से देखो दिल भर गया है।
क्या इश्क की ये शुरुआत हो रही है।।
इस दिल को न जाने क्या हो गया है।
रूह भी न जाने कहाँ खो रही है।।
कुछ बैचेन सा रहने लगा है दिल हमारा।
उनकी यादों में देखो सुबह से शाम हो रही है।।
अब अलग अलग सा मैं रहने लगा हूँ।
लोगों को मुझसे ये शिकायत हो रही है।।
शैल बिस्तर पे नीद अब आती कहाँ है।
चांदनी रात भी अब काली रात हो रही है।।

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