यमराज का न्याय

यमराज का न्याय

राम श्याम और मुकेश मरने के बाद स्वर्ग के दरवाजे पर यमराज से

राम : यमराज में पुजारी हुँ और दिन रात मेने ईश्वर की भक्ति की है मुझे स्वर्ग में भेजिए

यमराज : चित्र गुप्त इसे नर्क में भेजो

श्याम : भगवान में एक डॉक्टर हुँ और मेने हमेशा ही मरते हुए व्यक्तियों की जान बचाई है।

यमराज : इसे भी नर्क में भेजो।

यमराज मुकेश से तुम कोन हो

मुकेश : में एक शादी शुदा आदमी हुँ।

यमराज : बस कर पगले अब रुलाएगा क्या ?

जा अंदर जा जी ले अपनी मोत।