यहाँ जानिए मां कात्यायनी की पौराणिक कथा

Apr 11 2019 07:00 PM
यहाँ जानिए मां कात्यायनी की पौराणिक कथा

आप सभी को बता दें कि आज चैत्र शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को नवरात्र का छठा दिन आज के दिन देवी दुर्गा की छठी शक्ति मां कात्यायनी की उपासना की जायेगी. ऐसे में आज दोपहर 03 बजकर 32 मिनट तक शोभन योग रहेगा और शुभ कार्यों के लिये और कहीं बाहर यात्रा पर जाने के लिए ये योग बड़ा ही अच्छा माना जाता है. इसी के साथ आज के योग में यात्रा करने से किसी प्रकार की असुविधा नहीं होती और व्यक्ति को आनंद की अनुभूति होती है. कहते हैं आज जिस भी कामना से यात्रा की जाती है, वह कामना भी पूरी होती है और शोभन योग के अलावा आज सुबह 10 बजकर 25 मिनट तक सारे काम बनाने वाला रवि योग भी रहेगा.

(साप्ताहिक राशिफल 8 से 14 अप्रैल: चैत्र नवरात्रि का ये सप्ताह, इन राशियों पर बना रहेगा मां दुर्गा का आशीर्वाद) आप सभी को बता दें कि मां कात्यायनी देवी का शरीर सोने के समान चमकीला है और चार भुजा बाली मां कात्यायनी सिंह पर सवार हैं. साथ ही उन्होनें एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में कमल का फूल लेकर सुशोभित है और दूसरे दोनो हाथों में वरमुद्रा और अभयमुद्रा में हैं. वहीं मां कत्यायनी का वाहन सिंह हैं और आज हम बताने जा आरहे हैं इनसे जुड़ी एक पौराणिक कथा.

मां कात्यायनी की पौराणिक कथा-  पौराणिक कथा के अनुसार एक वन में कत नाम के एक महर्षि थे उनका एक पुत्र था जिसका नाम कात्य रखा गया. इसके बाद कात्य गोत्र में महर्षि कात्यायन ने जन्म लिया. उनकी कोई संतान नहीं थी. मां भगवती को पुत्री के रूप में पाने की इच्छा रखते हुए उन्होंने पराम्बा की कठोर तपस्या की. (12 अप्रैल नवरात्र में बुध कर रहा है मीन रशि में प्रवेश, इन 6 राशियों के जीवन पर पड़ेगा सीधा प्रभाव) महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें पुत्री का वरदान दिया. कुछ समय बीतने के बाद राक्षस महिषासुर का अत्याचार अत्यधिक बढ़ गया. तब त्रिदेवों के तेज से एक कन्या ने जन्म लिया और महिषासुर का वध किया. कात्य गोत्र में जन्म लेने के कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ गया.

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