सेना के लिए खरीदी जाएंगी दुनिया की सबसे घातक ब्रह्मोस मिसाइलें, सौदे को मिली मंजूरी

नई दिल्ली: रक्षा मंत्रालय ने देश के रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में अहम कदम उठाते हुए गुरुवार (22 सितम्बर) को ब्रह्मोस एयरोस्पेस (BAPL) के साथ एक महत्वपूर्ण डील फाइनल की है। यह डील सतह से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइलों की खरीद को लेकर की गई है। यह मिसाइलें 'बाय-इंडियन कैटेगरी' के तहत तक़रीबन 1,700 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी जाएंगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि इन दोहरी भूमिका निभाने वाली मिसाइलों के इंडियन नेवी के बेड़े में शामिल होने से बेड़े की मारक क्षमता और ऑपरेशनल कैपेबिलिटी बढ़ने जा रही है।

बता दें कि, ब्रह्मोस एयरोस्पेस (BrahMos Aerospace) भारत और रूस का संयुक्त रक्षा उद्यम है, जो हाइपरसोनिक मिसाइलें बनाने में सक्षम है। इसके तहत नई पीढ़ी की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें तैयार की जाती हैं और इन्हें वक़्त-वक़्त पर आधुनिक तकनीकों से लैस किया जाता है। ये मिसाइलें सतह से सतह पर मार करने के साथ ही एंटी टैंक अटैक को भी रोकती हैं। बयान में कहा गया है कि रक्षा उत्पादन क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत पर जोर देने के लिए रक्षा मंत्रालय ने बाय इंडियन कैटेगरी के तहत 1,700 करोड़ रुपये के खर्च से सतह से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइलों की खरीद के लिए समझौता किया है। इस डील से भारत की हथियार प्रणाली और गोला-बारूद के उत्पादन को और बढ़ावा मिलेगा। 

बता दें कि ब्रह्मोस को विश्व का सबसे तेज, बेस्ट और सबसे सटीक घातक हथियार माना जाता है। ये विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक मिसाइलें हैं, जो स्टेल्थ तकनीक से लैस होती हैं और सटीक लक्ष्य भेदने के लिए इनमें एडवांस सॉफ्टवेयर होते हैं। भारत पांच से छह वर्षों में पहली हाइपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल बनाने में कामयाब हो जाएगा। 

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