विश्व विरासत दिवस: ये है भारतीय विरासत की बेशकीमती धरोहर

Apr 17 2018 05:24 PM
विश्व विरासत दिवस: ये है भारतीय विरासत की बेशकीमती धरोहर

18 अप्रैल के दिन को वर्ल्ड हेरिटेज डे यानी विश्व विरासत दिवस के रूप में मनाया जाता है.  1982 को ट्यूनीशिया में इंटरनेशनल काउसिंसल ऑफ मान्युमेंट्स एंड साइट्स ने इसकी शुरुआत की थी जिसके एक साल बाद 1983 में संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को ने इसे मान्यता प्रदान कर दी. बस तब से लेकर अब तक ये परंपरा बदस्तूर जारी है. जब बात विरासत की चल रही है तो हम भी आपको भारतीय विरासत की बेशकीमती धरोहरों से रूबरू करवाते है. 

आगरा का ताजमहल
-उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में यमुना तट पर बना ताजमहल 1983 से विश्व विरासत स्थल की सूची में शामिल है 
-दुनिया के 10 प्रमुख विरासत स्थलों में शामिल है 
-मुगह बादशाह शाहजहां द्वारा 17 हेक्टेयर जमीन पर बनवाए गए ताजमहल का निर्माण कार्य 1632 में शुरू हुआ था और यह 1648 में बनकर पूरा हुआ
- ताजमहल को 22000 लोगों ने मिलकर बनाया था और तत्कालीन भारत के साथ ही ईरान और मध्य एशिया से भी इसको बनाने के लिए कारीगरों को बुलाया गया था.

दिल्ली का क़ुतुब मीनार
-गुलाम वंश के शासक कुतुबुद्दीन ऐबक के द्वारा बनवाई गई कुतुब मीनार को 1993 में यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत स्थल की सूची में जगह मिली
-यह मीनार भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है
- भारत की दूसरी सबसे ऊंची मीनार का खिताब हासिल करने वाली कुतुब मीनार की वास्तु कला वाकई अद्भुत है 

सूर्य मंदिर – ओडिशा
-कोणार्क का सूर्य मंदिर भारत के विश्व विरासत स्थलों की सूची में तीसरे नंबर पर आता है
-कोणार्क का सूर्य मंदिर पुरी के उत्तर पूर्वी किनारे पर समुद्र तट पास स्थित है
-1984 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया
- इसे लाल बलुआ पत्थर एवं काले ग्रेनाइट पत्थर से गंग वंश के राजा नृसिंहदेव द्वारा बनवाया गया था
-मंदिर को एक बारह जोड़ी चक्रों वाले, सात घोड़ों से खींचे जाते सूर्य देव के रथ के रूप में बनाया है

खजुराहो का स्मारक समूह – छतरपुर
-1986 में यूनेस्को ने मध्यप्रदेश के छतरपुर में स्थित चंदेला वंश द्वारा बनवाए गए खजुराहो के स्मारक समूह को विश्व धरोहर स्थल की सूची में स्थान दिया
-एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार खजुराहो में कुल 85 मन्दिर है जो 12वीं शताब्दी में बनाए गए थे
-वर्तमान में इनमें से, केवल 25 मन्दिर ही बचे हैं। यहां के मन्दिर जो नगारा वास्तुकला से स्थापित किये गए जिसमें ज्यादातर मूर्तियां कामुक कला को दर्शाती हैं

महाबोधि मंदिर – बोध गया
-बिहार के बोध गया में बना महाबोधि मंदिर 2002 में इस सूची में शामिल किया गया
- स्तूप की तरह बने इस मंदिर में गौतम बुद्ध की एक बहुत बड़ी मूर्ति स्थापित है
- ऐसा कहा जाता है कि यह मूर्ति उसी जगह पर है जहां गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था
- कहा जाता है कि तीसरी शताब्‍दी ईसा पूर्व में इसी स्‍थान पर सम्राट अशोक ने हीरों से बना राजसिहांसन लगवाया था और इसे पृथ्‍वी का नाभि केंद्र कहा था 

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान - असम
-काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान' एक सींग वाले भारतीय गैंडे का निवास है
-यह राष्‍ट्रीय उद्यान असम का एकमात्र राष्‍ट्रीय उद्यान है
- 430 वर्ग किलोमीटर में फैले इस उद्यान में कई दलदल और ऊबड़-खाबड़ मैदान हैं
-1905 में बने इस नेशनल पार्क में एक सींग वाला गैंडा, हाथी, भारतीय भैंसा मुख्य रूप से पाए जाते है.

चोला मंदिर – तमिलनाडु
-चोल शासकों द्वारा दक्षिणी भारत में बनवाया गया महान चोला मंदिर 1987 में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया गया
- मंदिर को 11वीं सदी की शुरुआत में बनाया गया था
-इसे तमिल भाषा में बृहदीश्वर के नाम से जाना जाता है
-यह मंदिर संस्कृत व तमिल पुरालेखों का उत्कृष्ट उदाहरण हैं
-इस मंदिर के निर्माण कला की एक विशेषता यह है कि इसके गुंबद की परछाई पृथ्वी पर नहीं पड़ती


अजंता एलोरा की गुफाएं - महाराष्ट्र
-1983 में अजंता और एलोरा की गुफाओं को यूनेस्को की सूची में जगह मिली
- ये महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के पास स्थित हैं
- यहां की सुंदर चित्रकारी व मूर्तियाँ कलाप्रेमियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं हैं
-अजंता में 29 और एलोरा में 34 गुफाएं हैं जो हमेशा से ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती रही हैं
-इन गुफाओं की खोज आर्मी ऑफिसर जॉन स्मिथ व उनके दल द्वारा सन् 1819 में की गई थी
- वे यहां शिकार करने आए थे तभी उन्हें 29 गुफाओं की एक श्रृंखला नजर आई और इस तरह ये गुफाएं प्रसिद्ध हो गई

भारत का पर्वतीय रेलवे – पश्चिम बंगाल, हिमाल प्रदेश, तमिलनाडु
-भारत के पर्वतीय रेलवे में दार्जिलिंग-हिमालयन रेलवे (पश्चिम बंगाल), नीलगिरी पर्वतीयर रेलवे (तमिलनाडु) और कालका शिमला रेलवे (हिमाचल प्रदेश) शामिल हैं
- इन्हें यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर में शामिल किया गया है
- ये रेलवे पहाड़ियों में रेल लिंक स्थापित करने की समस्या का मुकाबला करने के लिए किए गए इंजीनियरिंग कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण हैं


फतेहपुर सीकरी – आगरा
-1986 में यूनेस्को ने फतेहपुर सीकरी को इस सूची में शामिल किया
-आगरा से 22 किलोमीटर दक्षिण में स्थित इस छोटे से नगर को अकबर ने बसाया था
-फतेहपुर सीकरी में बुलंद दरवाजा, सलीम चिश्ती की दरगाह, जोधाबाई का महल जैसे स्मारक हैं जो अपनी बेजोड़ स्थापत्य कला के लिए मशहूर हैँ.

 

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