विश्व पर्यावरण दिवस को लेकर कहे गए हैं कई कथन

हर साल 5 जून को मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस इस साल भी इसी दिन मनाया जाने वाला है. आप सभी को बता दें कि हर साल इस दिन का एक ख़ास महत्व होता है वैसे ही इस साल भी इस ख़ास दिन का एक अलग ही महत्व होगा. इस साल विश्व पर्यावरण दिवस की मेजबानी भारत को सौंपी गई हैं अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत किस तरह से अपनी मेहनत से विश्व पर्यावरण दिवस की मेजबानी करता है. विश्व पर्यावरण दिवस हर साल अपने आपमें ही एक त्यौहार के रूप में होता है हर साल मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस के लिए कई बड़े-बड़े दिग्गज स्वतन्त्रता सेनानियों ने कथन कहे हैं जो आज हम आपको बताने जा रहे हैं.

यह कथन बड़े-बड़े प्रसिद्ध सेनानियों के द्वारा कहे गए हैं और बहुत ही शानदार और दिल को छू लेने वाले हैं. आइए बताते हैं. भारत को आजाद करवाने में अपना बहुत बड़ा योगदान देने वाले महात्मा गांधी ने इस बारे में कहा था कि “विश्व के जंगलों से हम क्या रहें हैं केवल एक शीशे का प्रतिबिंब है जो हम अपने और एक-दूसरे के साथ कर रहें हैं।” यह कथन बिलकुल सही है और यह कथन केवल वहीँ लोग समझ सकते हैं जिन्हे पर्यावरण से प्यार है.

इसी के साथ कई इंग्लिश राइटर्स, सेनानियों, ने भी इस बारे में लिखा है और अपने-अपने कथन पेश किए हैं जो वाकई में दिल को छू लेने वाले हैं. "Father of the National Parks" जॉन मुइर ने भी इस बारे में कहा है, उन्होंने कहा कि “इन पेड़ों के लिये भगवान ध्यान देता है, इन्हें सूखे, बीमारी, हिम्स्खलन और एक हजार तूफानों और बाढ़ से बचाता है। लेकिन वो इन्हें बेवकूफों से नहीं बचा सकता।” ऐसे ही कई बड़े-बड़े लोगों ने पर्यावरण को लेकर बातें की हैं और कई कथन कहे हैं, जो वाकई में पर्यावरण का महत्व समझाने वाले हैं.

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