इतिहास में दर्ज हुई श्रमिक ट्रेन

कभी -कभी कोई ऐसी घटना हो जाती है , जो अमिट यादों की तरह हमारे दिल में बस जाती है. इसी श्रेणी में श्रमिक ट्रेन को भी रखा जा सकता है.जमालपुर रेल कारखाना के स्थापना के समय से वहां के कर्मचारियों के लिए चलने वाली श्रमिक ट्रेन मंगलवार को इतिहास में दर्ज हो गई . मंगलवार की शाम 6.25 बजे यह ट्रेन कारखाना के कर्मचारियों को लेकर अपनी अंतिम सफर पर निकली.इस ट्रेन से घर जाने वाले यात्रियों को कल सुबह समय पर ड्यूटी पर आने की चिंता सताने लगी .

उल्लेखनीय है कि रेलवे बोर्ड के निर्णय के अनुसार लगभग 156 साल से चल रही यह ट्रेन 1 नवंबर से बंद कर दी गई है. ख़ास बात यह है कि इस रेल का 8 फरवरी 1862 में जमालपुर रेल कारखाने की स्थापना के समय से ही परिचालन हो रहा था . जमालपुर रेल कारखाने का निर्माण तब हुआ था, जब पूर्वी भारत में ईस्ट इंडियन कंपनी रेलवे का विस्तार कर रही थी. यह ट्रेन अब इतिहास में दर्ज हो गई.

इस पुरानी ट्रेन को बंद करने का कारण बताते डीआरएम मोहित सिन्हा ने कहा कि अब कारखाने 518 कर्मचारी ही रह गए है. इतने कम कर्मचारियों के लिए दो-दो ट्रेन चलाने में रेलवे को नुकसान हो रहा था. इसलिए बोर्ड ने इसे बंद करने का निर्णय लिया. वहीं इस श्रमिक ट्रेन को अंतिम बार चला रहे ट्रेन के ड्राइवर संजय कुमार मंडल और गार्ड राकेश कुमार ने बोर्डे के फैसले पर कुछ नहीं कहा लेकिन यह जरूर कहा कि आज अच्छा नहीं लग रहा है. वहीँ कर्मचारी यात्रियों ने हर माह 1890 रुपये के टोकन पास का जिक्र कर रेलवे से हिसाब मांग लिया .

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