महिला जींस : रेप या सुरक्षा ?

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Dec 01 2014 03:10 PM
महिला जींस : रेप या सुरक्षा ?
style="color: rgb(0, 0, 0); font-family: Arial, Tahoma, Verdana; font-size: 14px; line-height: 20px; text-align: justify;">आज पूरे देश में रोहतक की दो बहनों द्वारा तीन मनचलों की बस में पिटाई का मामला छाया हुआ है वहीं हरियाणा सरकार ने उन्हें उनके साहस और वीरता के लिए 26 जनवरी पर सम्मान देने की घोषणा की है! जहां देश में खाप पंचायतें, कुछ राजनेता और कुछ संगठन महिलाओं को जींस पहनने को रेप का कारण मानते हैं वहीं इन दो बहादुर बहनों ने कहा कि यदि वे जींस नहीं पहने होती तो शायद वे उन मनचलों का मुक़ाबला नहीं कर पाती! इन दो बहादुर बहनों ने कहा वे जींस पहने थी इसलिए अपनी सुरक्षा कर सकीं वरना सलवार सूट तो कब का फट चुका होता!
 
सवाल उठता है कि महिलाओं का पहनावा विशेष रूप से जींस पर इतना बवाल क्यों होता है? जींस रेप के लिए जिम्मेदार है या सुरक्षा देती है?  यदि जींस पहनने के कारण रेप की घटनाएँ होती हैं तो फिर 2-3 साल की छोटी बच्चियों या फिर अधेड़ महिलाओं से या 6 मीटर की साड़ी में लिपटी महिलाओं से रेप क्यों होते हैं? क्या जींस या महिलाओं का पहनावा ही रेप के लिए उत्तरदायी है? या फिर समाज की घटिया सोच, रेपिस्ट को बढ़ावा देती है?
 
एक तरफ कुछ नेता कहते हैं कि महिलाओं की जींस उकसाती है तो क्या जब उनकी बीवी,बेटियाँ जींस पहनती है तो भी वे बेकाबू हो जाते हैं? ? लड़कियों का पहनावा रेप करने के लिए नहीं उकसाता बल्कि रेपिस्ट की घटिया और छोटी सोच रेप के लिए उकसाती है! वरना इस तरह के बयान देने वाले लोग अपनी बेटी और बीवी की जींस और दूसरे की बेटी और बीवी की जींस में अंतर नहीं करते!
 
तुगलकी फरमान देने वाली पंचायतें या महिलाओं के पहनावे को लेकर बेतुकी टिप्पणी करने वाले राजनेता और संगठन अपनी छोटी सोच क्यों नहीं बदलते? लड़कों पर पाबंदी क्यों नहीं लगाते जिस भारत देश में नारी की पूजा होती थी आज वहीं उसकी अस्मिता तार – तार होती है! महिला को देवी नहीं भोग की वस्तु समझा जाने लगा है! जब तक इंसान अपनी संकीर्ण मानसिकता के दायरे से बाहर नहीं आयेगा, अपनी सोच नहीं बदलेगा! जब तक पुरुष सत्तात्मक समाज रहेगा! 
 
लड़के-लड़कियों में भेदभाव बना रहेगा! लड़कों की हर गलती को माफी और लड़की की छोटी सी गलती को पाप समझा जाएगा, तब तक देश और समाज तरक्की नहीं कर सकता! आखिर हम क्यों अपने को आधुनिक समाज कहते हैं जबकि सोच आज भी संकीर्ण हैं!  
 
हमारा समाज समानता का दंभ भरता है! लेकिन आज भी लड़के और लड़कियों के बीच एक गहरी खाई है! माँ-बाप कभी बेटे पर बन्दिशें नहीं लगाते लेकिन बेटी पर तमाम तरह के कायदे-कानून लाद दिये जाते हैं! क्योंकि बेटी तो घर की इज्जत है तो फिर बेटा आवारा है जिसकी सब गलतियाँ माफ होंगी ??
 
आज का जमाना वह है जहां घर की चौखट से बाहर निकलकर महिलाएं भी समाज में कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं! देश की तरक्की में योगदान दे रही हैं! अब ऐसे में घर की दीवार से बाहर महिलाएं अपनी सुविधा के हिसाब से अपने कपड़ों का चयन करती है जिसमें उन्हें जींस आरामदायक पहनावा लगता है तो इसमें गलत क्या है?