महिलाओं का शनि शिंगणापुर में पूजन करना गलत कदम

उज्जैन : महिलाओं का शनि पूजन करना ठीक नहीं है दरअसल महिलाओं और पुरूषों में प्रकृति द्वारा दिया गया भेद होता है इस भेद को हटाया नहीं जा सकता है। जिसके कारण महिलाओं के अपने महत्व को समझते हुए कार्य करने चाहिए। यह बात सुमेरू पीठ काशी के शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने कही। सिंहस्थ 2016 के तहत उज्जैन पहुंचन पर शंकराचार्य ने मीडिया से चर्चा में यह बात कही। 

यही नहीं शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती का श्री शिरडी के सांई बाबा की पूजा को लेकर भी अलग ही मत है। वे मानते हैं कि श्री सांई बाबा का पूजन लोग स्वेच्छा से कर रहे हैं। उनका कहना था कि यदि यह कहा जा रहा है कि सांई पूजन के कारण महाराष्ट्र में सूखा पड़ा है तो फिर मध्यप्रदेश में तो शिव की पूजा होती है फिर यहां पर कुछ स्थानां पर जल की उपलब्धता क्यों नहीं है।

शनि शिंगणापुर को लेकर उन्होंने कहा कि महिलाओं और पुरूषों में प्रकृति प्रदत्त भेद हैं। जिसके कारण जो महिलाओं के लिए वर्जित हैं वे वर्जित रहने चाहिए। इन भेदों को हटाया नहीं जा सकता है। यदि ऐसा नहीं होता तो फिर पुरूष और स्त्रि समान रूप से गर्भधारण कर लेते। उन्होंने भूमाता रण रागिनी ब्रिगेड की अध्यक्ष तृप्ति देसाई को गलत बताया।

उन्होंने कहा कि स्त्रियां सनातन में स्वतंत्र जरूर थीं लेकिन वे स्वच्छंद नहीं थीं। उन्होंने कहा कि श्री सांई बाबा के पूजन की व्याख्या मीडिया में होने से पहले संत जगत में होना चाहिए थी।  उन्होंने कहा कि वर्तमान में वेदों के अनुसार कुछ भी नहीं होता है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य को शास्त्र सम्मत बात करनी चाहिए। यही सर्वोत्तम है। शंकराचार्य स्वरूपानंद वरिष्ठ शंकराचार्य हैं उन्हें विवादित मसलों पर चर्चा नहीं करना चाहिए।  

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