रमज़ान: क्या औरतें भी कर सकती है पुरुषों की तरह एतकाफ

रमज़ान में एतकाफ का भी बहुत महत्व होता है और यह रमज़ान की आखिरी रातों में किया जाता है. एतकाफ का मतलब यह होता है कि जब रमज़ान के महीने में केवल आखिरी के दस रोज़े बचे रह जाए तो व्यक्ति अपने घर को छोड़कर वो दस दिन केवल मस्जिद में बीतता है वहीं इफ्तारी करता है, वही सेहरी और वही नहाना धोना. एतकाफ में लोग मस्जिद में केवल अल्लाह के पास रहते हैं और उनकी खिदमत करते हैं. जिस दिन रमजान खत्म होती है उस दिन एतकाफ खत्म होता है और लोग अपने घर लौट जाते हैं. ऐसे में एक सवाल ये उठता है कि क्या महिलाएं भी एतकाफ कर सकती है, क्या उन्हें यह हक है..? आइए बताते है इसका जवाब..

दरअसल में महिलाएं एतकाफ तो कर सकती हैं लेकिन केवल घर में रहते हुए. जी हाँ, महिलाएं एतकाफ कर सकती है लेकिन घर में रहते हुए. कहाँ जाता है कि रमजान के आखिरी दिनों में एक ऐसी रात होती है जिसे शबे कदर कहाँ जाता है और इस रात में लोगों की दुआ कबूल होती है. इस दिन मुलमान पुरुष मस्जिद के अंदर दुआ कर सकते है वहीं महिलाएं अपने घर में रहते हुए दुआ कर सकती हैं. कहाँ जाता है कि केवल पुरुष ही एतकाफ कर सकते है और जहाँ तक मुमकिन हो महिलाओं को एतकाफ नहीं करना चाहिए, लेकिन अगर वह फिर भी एतकाफ करना चाहती है तो वह पर्दे में रहकर एतकाफ कर सकती हैं. इस दौरान महिलाओं को सभी जगह की पंचायतों से दूर रहकर केवल अल्ल्ह को याद करना चाहिए.

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