गणेश जी ने विवाह के लिए माँ तुलसी को दिया था प्रस्ताव, मिला था श्राप

गणेश जी ने विवाह के लिए माँ तुलसी को दिया था प्रस्ताव, मिला था श्राप
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गणेश जी को प्रथम पूजनीय माना जाता है। ऐसे में बुधवार का दिन गणपति बप्पा का दिन होता है और बुधवार आने से पहले आज हम आपको बताने जा रहे हैं गणपति बप्पा और माँ तुलसी की कहानी। यह कहानी शायद ही आपने कभी पढ़ी या सुनी होगी। 

पौराणिक कथा- एक दिन तुलसी देवी गंगा घाट के किनारे से गुजर रही थीं। उस समय गणेश जी वहां पर ध्यान कर रहे थे। गणेश जी को देखते ही तुलसी देवी उनकी ओर आकर्षित हो गईं और गणेश जी को विवाह का प्रस्ताव दे दिया। लेकिन गणेश जी ने इस प्रस्ताव से मना कर दिया था। गणेश जी से न सुनने पर तुलसी देवी बेहद क्रोधित हो गईं, जिसके बाद तुलसीदेवी ने गणेश जी को श्राप दिया कि उनके दो विवाह होंगे। इस पर गणेश जी ने भी तुलसी को शाप दे दिया कि उनका विवाह एक असुर से होगा।

ये शाप सुनते ही तुलसी गणेश भगवान से माफी मांगने लगीं। तब गणपति ने कहा कि तुम्हारा विवाह शंखचूर्ण राक्षस से होगा लेकिन इसके बाद तुम पौधे का रूप धारण कर लोगी। गणेश भगवान ने कहा कि तुलसी कलयुग में जीवन और मोक्ष देने वाली होगी लेकिन मेरी पूजा में तुम्हारा प्रयोग नहीं होगा। इसलिए गणेश भगवान को तुलसी चढ़ाना शुभ नहीं माना जाता है। गणेश जी की दो पत्नियां थीं। रिद्धि और सिद्धि और उनके दो पुत्र शुभ और लाभ हैं। 

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