भगवान राम और माँ सीता को गालियां देने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं ? कालीचरण महाराज की गिरफ़्तारी पर उठे सवाल

नई दिल्ली: मोहनदास करमचंद गाँधी को लेकर दिए गए एक बयान के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा कालीचरण महाराज गिरफ्तार किए जाने के बाद यह मामला ठंडा होने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस मामले पर जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि ने प्रतिक्रिया देते हुए सवाल किया है कि यदि सरकार सच में इतनी संवेदनशील है तो भगवान राम और सीता माता का मज़ाक उड़ाने वालों और उन्हें व्यभिचारी कहने वालों पर भी कार्रवाई करे।

स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि ने कहा है कि कालीचरण महाराज ने गाँधी पर जो भी टिप्पणी की है, संत समाज उसका समर्थन नहीं करता है। गाँधी जी का सम्मान है, किन्तु इस देश में परम पूज्य भगवान श्री राम को आए दिन गालियाँ दी जाती हैं और सीता माता को व्यभिचारिणी कहा जाता है। टीवी सीरियल्स और फिल्मों में उनका मज़ाक उड़ाया जाता है, देवी-देवताओं की नग्न तस्वीरें बनाई जाती हैं। उस समय कोई कुछ क्यों नहीं बोलता। उनपर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती। बकौल स्वामी जी, भारतीय स्वतंत्रता आदोलन में अहिंसा को सबसे ऊपर रखने को लेकर गाँधी जी का योगदान सम्मानीय है। संत ने यह भी याद दिलाया कि गांधी जी के अफ्रीका से भारत आने से पहले भी कई क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया था और उन्हें भी याद करने की आवश्यकता है। 

उन्होंने कहा कि किसी एक शख्स को स्वतंत्रता संग्राम का श्रेय नहीं दिया जा सकता। उस लड़ाई में सुभाष चंद्र बोष, चंद्रशेखर आजाद, वीर सावरकर, बाल गंगाधर तिलक सहित कई लोग शामिल थे। स्वामी जी ने द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की बात का समर्थन करते हुए कहा कि 'उन्होंने बड़ी अच्छी बात कही है कि आदर और सम्मान अपनी जगह है। मगर राष्ट्र से बड़ा कोई नहीं हो सकता। यदि राष्ट्र से बड़ा कोई है तो वो परमात्मा है। गाँधी 'राष्ट्रपिता' नहीं, राष्ट्र के पुत्र हो सकते हैं।

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