आखिर क्या है ऐसा, जो कश्मीरी लड़कियां नहीं करती दूसरे राज्य के युवकों से शादी ?

श्रीनगर: 14 फ़रवरी को पुलवामा में  CRPF के जवानों पर हुए आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में लागू हुई धारा-370 को हटाने की मांग तेज हो गई है। किन्तु आप में से अधिकतर लोग शायद ही जानते नहीं होंगे कि आखिर धारा-370 है क्या बला और क्यों निरंतर देश में इस धारा को हटाने की मांग उठाता रहता है। धारा 370 घाटी को पूरे भारत से अलग रखने का कार्य करती है और ये इस धारा के प्रावधानों में वर्णित है। 

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इस धारा की सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि इसमें जम्मू-कश्मीर में रहने वाले सभी लोगों को दोहरी नागरिकता मिली हुई है, जबकि जम्मू-कश्मीर के बाशिंदों के अलावा भारत के किसी भी कोने में रहने वाले हर नागरिक को केवल एक नागरिकता मिली हुई है। जम्मू-कश्मीर में भारत का ध्वज नहीं फहराया जाता, क्योंकि वहां का एक अलग ध्वज है, जिसे इस इलाके में मान्यता प्राप्त है। जम्मू कश्मीर में अगर भारत के ध्वज का अपमान किया जाता है, तो भी उसपर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है, क्योंकि पूरे जम्मू कश्मीर में ऐसा करने अपराध नहीं माना जाता है।

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वहीं अगर जम्मू कश्मीर की कोई महिला अगर भारत के किसी अन्य राज्य के शख्स से शादी कर ले, तो उस महिला की जम्मू कश्मीर से नागरिकता समाप्त हो जाएगी, वो महिला फिर कश्मीरी नहीं कहलाएगी। वहीं अगर जम्मू कश्मीर की ही कोई महिला किसी पाकिस्तानी नागरिक से शादी कर ले तो उस व्यक्ति को भी कश्मीर की नागरिकता प्राप्त हो जाती है। जम्मू-कश्मीर में महिलाओं पर भारतीय कानून नहीं बल्कि शरीया कानून लागू है जो कि किसी अन्य राज्यों में लागू नहीं है। यही वजह है कि देश की सुरक्षा के लिए इस धारा को ख़त्म करने की मांग उठती रहती है।

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