हिन्दुओं और ईसाईयों की हत्या की बात करने वाले PFI का साथ क्यों दे रही केरल पुलिस ?

हिन्दुओं और ईसाईयों की हत्या की बात करने वाले PFI का साथ क्यों दे रही केरल पुलिस ?
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कोच्ची: भारत में देश विरोधी गतिविधियां संचालित करने के चलते प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की मदद कुछ सरकारी कर्मचारी भी करते हैं। अब तक इन आरोपों का कोई पुष्ट आधार नहीं था। लेकिन अब एक महिला पुलिस अधिकारी की करतूत ने इन आरोपों को सच साबित कर दिया है। फिलहाल आरोपी महिला सहायक उप-निरीक्षक को निलंबित करके उसके खिलाफ उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस महिला पर इल्जाम है कि उसने कुछ दिन पहले PFI नेता से जुड़े उसकी एक पोस्ट को फेसबुक पर वायरल किया था।

निलंबित महिला पुलिस अधिकारी ASI का नाम रामला इस्माइल बताया गया है। आरोपी महिला पुलिस अधिकारी इन दिनों केरल के कोट्टायम जिले के थाना कांजीरापल्ली में पदस्थ थी। विभागीय जांच में यह साबित हो गया था कि महिला अफसर ने 5 जुलाई को यह विवादित पोस्ट वायरल की थी। यह पोस्ट PFI नेता एए रऊफ के फेसबुक एकाउंट से लेकर वायरल की गई थी। घटना की जांच रिपोर्ट हाल ही में कांजीरापल्ली के पुलिस उपाधीक्षक ने कोट्टायम जिले के पुलिस प्रमुख कार्तिक को सौंपी थी। इस मामले के संज्ञान में आने के बाद एर्नाकुलम रेंज के उप-महानिरीक्षक नीरज गुप्ता ने 19 जुलाई को रामला इस्माइल के खिलाफ जांच के आदेश जारी किए थे। निलंबित महिला एएसआई मूल रुप से एराट्टुपेट्टा की निवासी है। हालांकि विभागीय जांच कमेटी के सामने आरोपी महिला पुलिस अफसर ने बयान में बताया था कि उसने नहीं, बल्कि उसके पति ने विवादित पोस्ट को फेसबुक पर वायरल किया था। दरअसल, 21 मई को अलाप्पुझा में आयोजित PFI रैली इस घटना की जड़ बताई जा रही है।

इस रैली में एक शख्स के कंधों पर बैठे एक नाबालिग बच्चे ने हिन्दुओं और ईसाईयों के खिलाफ नफरत भरे नारे लगाए थे। यहाँ तक कि, उस रैली में हिन्दुओं और ईसाईयों की हत्या तक कि बात हुई थी। जिसके बाद केरल में हंगामा मच गया था। उस दौरान पुलिस ने PFI के 30 से अधिक समर्थकों को अरेस्ट किया था। जब वे सब जेल से बाहर निकले तो PFI के राज्य सचिव (केरल) सीए रऊफ ने फेसबुक पर पुलिस और अदालत की कार्यवाही के खिलाफ एक पोस्ट वायरल कर दी थी। इसी पोस्ट को वायरल करने के आरोपों में घिरी महिला सहायक उप निरीक्षक (केरल पुलिस) रामला इस्माइल को अब निलंबित कर दिया गया है।

बताया जा रहा है कि बीते चार माह के दौरान यह ऐसी तीसरी घटना है, जिसमें, PFI जैसे बदनाम और प्रतिबंधित संगठन का समर्थन करने में खाकी वर्दीधारी विवादों में उलझे हों। इस महिला ASI से पहले राज्य अग्निशमन सेवा के दो अधिकारी भी सस्पेंड किए जा चुके हैं। जबकि तीन अन्य का तबदला कर दिया गया था। और तो और इसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाए जाने के कारण फरवरी महीने में इडुक्की में थोडुपुझा के पास करीमन्नूर थाने में सिविल पुलिस का एक अधिकारी तो बर्खास्त तक करना पड़ गया था। पीके अनस नामक उस अधिकारी पर कथित रुप से PFI और SDPI की मदद करने का इल्जाम लगा था। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि, जो PFI देश को तोड़ने की साजिश रच रहा है, 2047 तक भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने पर काम कर रहा है, हिन्दुओं और ईसाईयों के खात्मे की बात करता है, उस PFI को केरल पुलिस के अफसर क्यों सपोर्ट कर रहे हैं ? क्या केवल इसलिए कि वो पुलिसकर्मी भी मुस्लिम हैं और PFI संगठन भी मुस्लिम है ? और इसी कारण मजहब के नाम पर देश को दरकिनार कर दिया गया है। 

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