क्या कारण है कि गजानन हर युग में बदलते है अपना वाहन

Feb 24 2016 08:20 AM
क्या कारण है कि गजानन  हर युग में बदलते है अपना वाहन

सभी देवताओं में प्रथम पूज्य गणेश जी है. जिनका वाहन चूहा है.गणेश जी को उनका यह वाहन बहुत प्रिय है. इस वाहन चूहा जिसे संस्कृत में मूषक कहते हैं, यह शारीरिक आकार में छोटा तो होता पर गजानन  के पास रहने से बुद्धिमान होता है.गणेश जी बुद्धि के देवता है तो चूहा को तर्क-वितर्क का प्रतीक माना गया है.चूहे में इसके अलावा और भी कई गुण होते हैं, यही कारण है कि गणेशजी ने चूहे को ही अपना वाहन चुना था.

हिन्दू धर्म में बहुत से पुराण है उन्हीं में से एक गणेश पुराण है जिसके अनुसार हर युग में गणेश जी का वाहन बदलता रहता है. सतयुग में गणेश जी का वाहन सिंह है .त्रेता युग में गणेश जी का वाहन मयूर है. और वर्तमान युग यानी कलियुग में उनका वाहन घोड़ा है.चूहा तो द्वापर युग में उनका वाहन था.

चूहा को ही क्यों बनाया अपना वाहन -

इसके बारे में विस्तार पूर्वक वर्णन धर्मग्रंथों में किया गया है. इसकी कथा कुछ इस तरह कि है -एक बार महर्षि पराशर अपने आश्रम में ध्यान अवस्था में थे. तभी वहां कई चूहे आए और उनका ध्यान भंग करने लगे.उन चूहों ने आश्रम को तहस-नहस कर दिया.

महर्षि पराशर का ध्यान भंग हो गया, वह यह सब कुछ देख रहे थे. वह इस समस्या के समाधान के लिए गणेश जी का स्मरण करने लगे.गणेश जी को जब महर्षि की समस्या के बारे में पता चला तो उन्‍होंने सभी चूहों को वहां से भगाने के लिए अपना पाश( रस्सी नुमा शस्त्र) फेंका.

आश्रम में एक चूहा ऐसा था जो सबसे ज्यादा उत्पात मचा रहा था. पाश ने उस चूहे को बांधकर गणेशजी के सामने उपस्थित किया.विशालकाय रूप के गणेशजी को देख वह चूहा उनकी उपासना करने लगा. गणेश जी ने उस चूहे से कहा, अब तुम मेरी शरण में हो तुम जो चाहे मांग लो तब उस चूहे ने गणेश जी की बातों को सुन अपने में अहंकार पैदा कर लिया और उसने गणेश जी से कहा, मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए, यदि आपको कुछ चाहिए तो आप मुझसे मांग सकते हैं.

गणेश जी उसकी बात सुनकर प्रसन्न हुए और चूहे से कहा, मूषक यदि तुम कुछ देना चाहते हो तो मेरे आजीवन वाहन बन जाओ
चूहे ने  गणेश जी की बात को स्वीकार कर लिया पर जब गणेशजी, चूहे पर बैठे तो उसका शरीर, गणेशजी के वजन को सह नहीं पाया और उसका घमंड चूर-चूर हो गया उसने गणेश जी से  माफी मांगी.और तभी  गणेश जी ने अपना वजन कम किया और इस तरह आज तक गणेश जी का वाहन वही चूहा है,