किसके सर होगा यूपी पुलिस का ताज़

लखनऊ : यूपी में डीजीपी अरविंद कुमार जैन का कार्यकाल समाप्त होने को है। ऐसे में राज्य पुलिस की कमान किसके हाथ आती है यह एक बड़ा सवाल है। फिलहाल राज्य के डीजीपी के तौर पर जगमोहन यादव और जावीद अहमद का नाम लिया जा रहा है। मगर इस रेस में जगमोहन यादव को उपयुक्त बताया जा रहा है। अब देखना ये है कि डीजीपी के पद पर कौन अधिकारी काबिज होते हैं। उत्तरप्रदेश कई मायनों में पुलिस व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। एक ओर जहां वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है तो दूसरी ओर अमेठी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का संसदीय स्थल है।

यहां अधिकांश मौकों पर विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेताओं का आना - जाना लगा रहता है। ऐसे में उनकी सुरक्षा को लेकर राज्य पुलिस की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। यही नहीं यहां जातिवाद और समाजवाद भी बड़े पैमाने पर देखने को मिलता है दूसरी ओर अपराधों का ग्राफ भी अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा अधिक होता है। ऐसे में इस राज्य के जीडीपी की जिम्मेदारी बेहद अहम हो जाती है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि कुछ समय पहले राज्य के डीजीपी नियुक्त किए गए अरविंद कुमार जैन का एक्सटेंशन पीरियड समाप्त हो रहा है। ऐसे में उनके स्थान पर नए डीजीपी की ऐलान होना है।

अब यह सवाल है कि आखिर किसे इस राज्य के पुलिस महकमे की कमान सौंपी जाए। हालांकि जगमोहन यादव को समाजवादी पार्टी का नज़दीकी माना जाता है जिसके चलते माना जा रहा है कि वे ही डीजीपी बनाए जा सकते हैं। मगर आईपीएस जावीद अहमद का नाम भी विकल्प के तौर पर लिया जा रहा है। हालांकि प्रदेश में जल्दी - जल्दी डीजीपी बदले गए हैं। दरअसल जो भी अधिकारी इस पद पर पदस्थ होते हैं उनका कार्यकाल बहुत छोटा होता है।

यदि जगमोहन को डीजीपी बनाया जाता है तो वे 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो जाऐंगे। ऐसे में प्रदेश की कानून व्यवस्था सुधरने की गंुजाईश कम ही नज़र आती है। दरअसल जो भी अधिकारी इस पद पर पदस्थ होते हैं उन्हें अपना काम संभालने में कुछ समय लगता है, और जब वे काम संभाल लेते हैं, तब तक तो उनका रिटायरमेंट ही करीब आने लगता है।

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