कब खुलेगा निजामुद्दीन मरकज ? ‘दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड’ की याचिका पर केंद्र सरकार ने दिया ये जवाब

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सार्वजनिक एंट्री के लिए दिल्ली में स्थित निजामुद्दीन मरकज को खोलने से साफ़ मना कर दिया है। मोदी सरकार ने कहा कि निजामुद्दीन मरकज अभी जाँच का हिस्सा है और इस मामले के दुष्प्रभाव बॉर्डर पार भी पड़े हैं, इसीलिए कूटनीतिक रूप से विचार-विमर्श भी इसमें शामिल है। दरअसल, ‘दिल्ली वक्फ बोर्ड’ ने उच्च न्यायालय में एक याचिका डाल कर कहा था कि मरकज का परिसर तालाबंद नहीं रखा जाना चाहिए।

‘दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड’ ने कोर्ट में ये भी कहा कि तबलीगी जमात के निजामुद्दीन मरकज की वास्तविक प्रकृति को पुनर्स्थापित किया जाना चाहिए। हालाँकि, अमित शाह के प्रभार वाले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय में जवाब दायर करते हुए इस माँग का विरोध किया। मंत्रालय ने कहा कि मरकज, मस्जिद और इसके संचालक जाँच का हिस्सा हैं, जो अभी जारी है। इस मामले में प्राथमिकी भी दर्ज हुई थी। गृह मंत्रालय के मुताबिक, मस्जिद बँगलेवाली मरकज, काशिफ उल-उलूम मदरसा और बस्ती निजामुद्दीन के प्लॉट्स को लेकर नोटिस भेजे जा चुके हैं और इसके स्वामित्व के दस्तावेज़ों को तलब कर के इसकी जाँच की जा रही है। बता दें कि 31 मार्च, 2021 से ही मरकज़ तालाबंद है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस सम्बन्ध में केंद्र सरकार व पुलिस से जवाब तलब किया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई नवंबर में होगी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस से भी कहा कि वो हमेशा के लिए किसी संपत्ति को नहीं रख सकती, क्योंकि प्राथमिकी होने के बाद इसे जब्त किया गया था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस से पूछा कि वो कब तक इस संपत्ति को रखना चाहती है और उसने किससे इसका स्वामित्व प्राप्त किया है। हाई कोर्ट ने कहा कि इसे आपको कभी न कभी तो लौटाना होगा। केंद्र सरकार के मुताबिक, तबलीगी जमात के 1300 विदेशी इसमें रहते हुए पाए गए थे।

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