इस खिलाड़ी ने टेनिस गेम को कई बार जीतकर भारत का नाम किया रोशन

एक समय था जब चैक-गणराज्य की मार्टिना नवरातिलोवा टेनिस की स्टार खिलाड़ियों में शामिल थीं. उस समय भारतीय टेनिस का प्रतिनिधित्व करने वाले विजय अमृतराज ने उनसे भारत आने की अपील की थी. अमृतराज ने मार्टिना से कहा कि वह भारत आएं, ताकि लड़कियों में टेनिस के प्रति जागरूकता पैदा हो. अमृतराज के इस प्रस्ताव पर मार्टिना ने कहा कि ये 'इंडिया' ग्लोब में है कहां? अमृतराज ने तब भारत की परिभाषा यह कहकर दी थी कि जहां पर दुनिया के सात आश्चर्यों में एक 'ताज महल' है, उसी देश का नाम भारत है. जिस मार्टिना नवरातिलोवा को ग्लोब पर भारत नजर नहीं आता था, उसी देश के खिलाड़ी लिएंडर पेस (Leander Paes) के साथ उन्होंने 17 साल पहले 2003 में पहले ऑस्ट्रेलियन ओपन और फिर उसी साल विंबलडन का मिक्स्ड डबल्स खिताब जीता. पेस देश में टेनिस का चेहरा बने और कई युवाओं को खेलने के लिए प्रेरित किया.

भारतीय टेनिस में पेस का योगदान काफी अहम: भारतीय टेनिस में पेस (Leander paes) ने बहुत बड़ा योगदान दिया है. उनकी उपबल्धियों ने असल मायने में देश में कई युवाओं को इस खेल से जोड़ने काम किया. पेस ने 18 ग्रैंड स्लैम अपने नाम किए हैं. सीनियर वर्ग में जाने से पहले उन्होंने सबसे पहला ग्रैंडस्लैम पहले जूनियर वर्ग में जीता. जहां उन्होंने यूएस ओपन और जूनियर विबंलडन का‌ खिताब अपने नाम किया था. इसके बाद 1996 में ओलिंपिक में देश को ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल दिलाकर उन्होंने नए सफर की शुरुआत की. 30 साल के उनके सफर में वह 18 ग्रैंड स्लैम, 44 डेविस कप के मुकाबले जीत चुके हैं साथ ही एटीपी डब्ल्स रैंकिंग में नंबर वन बनने वाले पहले खिलाड़ी थे.

भूपति के साथ दिखाए भारतीय टेनिस को अच्छे दिनपेस वैसे तो कमाल के खिलाड़ी थे लेकिन भूपति के साथ उनकी जोड़ी ने देश में टेनिस को सुनहरे दिन दिखाए. एक समय पर यह लिएंडर पेस और महेश भूपति की जोड़ी सबसे कामयाब और भरोसेमंद जोड़ियों में शामिल थी. पेस के ओलिंपिक मेडल के बाद 1996 से दोनों ने साथ में खेलने शुरू किया और अगले छह साल में कई उपलब्धियां हासिल की. 1996- 2002 के बीच में इनका प्रदर्शन शानदार रहा था. इनकी जोड़ी ने एक साथ 4 ओलिंपिक खेले हैं. इसके अलावा इस जोड़ी ने जहां डेविस कप में 23 सीधी जीतों का रिकॉर्ड दर्ज कराया साथ ही तीन ग्रैंड स्लैम खिताब पर भी कब्जा जमाया. हालांकि साल 2002 के बाद दोनों साथ में नहीं खेले.

पेस को आर्दश मानने वाले इन खिलाड़ियों पर है भारतीय टेनिस को आगे ले जाने की जिम्मेदारी: पेस (Leander paes) के लंबे करियर के दौरान रोहन बोपन्ना, युकी भांबरी, सोमदेव बर्मन, साकेत मायनेनी, प्रजनेश गुणेश्वरन, रामकुमार रामनाथन, सुमित नागल जैसे खिलाड़ी आए. इनमें से कुछ का संघर्ष पूरा हो चुका है और कुछ का अभी भी जारी है. पेस से प्रेरणा लेकर कई भारतीय खिलाड़ियों ने टेनिस में देश का प्रतिनिधित्तव करने का फैसला किया. इसमें सबसे पहले थे सोमदेव बर्मन. उन्होंने 2010 में दिल्ली कॉमनवेल्‍थ गेम्स में सिंगल्स का गोल्ड और 2010 एशियन गेम्स में सिंगल्स और डबल्स का गोल्ड जीता. उन्होंने रोजर फेडरर और राफेल नडाल का भी सामना किया. मियामी मास्टर्स में मिलोस रोओनिच को हराकर तहलका मचा दिया था. उनके अलावा युकी भांबरी ने भी पेस की ही तरह टेनिस में एंट्री की थी. वह भी पेस की तरह जूनियर में नंबर एक पर रहे. 2008 में ऑस्ट्रेलियन ओपन जूनियर चैंपियनशिप का खिताब जीता था. रामकुमार रामनाथन (Ramkumar Ramanathan) सोमदेव बर्मन के बाद एटीपी वर्ल्ड टूर के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय बने थे. फिलहाल तो युवा टेनिस खिलाड़ियों में सुमित नागल (Sumit Nagal) और प्रजनेश ही भारतीय चुनौती पेश कर रहे हैं. प्रजनेश गुणेश्वरन टॉप रैंक के भारतीय ‌खिलाड़ी हैं. उनकी मौजूदा रैंकिंग 94वीं है.

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