संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नजर आ सकता है भारत का दबदबा, जानें क्या है प्राथमिकता

लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण के बीच भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में अस्थायी सदस्य के तौर पर जनवरी, 2021 से अपनी नई पारी की शुरुआत करने के लिए पूरी तरह से तैयार है. दो साल के कार्यकाल के लिए 17 जून, 2020 को चुनाव है. भारत ने शुक्रवार को अपनी दावेदारी के पक्ष में अभियान शुरू किया. हालांकि, एशिया-प्रशांत क्षेत्र से भारत इकलौता दावेदार है, इसलिए उसका चुना जाना महज औपचारिकता है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत की दावेदारी के पक्ष में अभियान शुरू करते हुए अस्थायी सदस्य के तौर पर उसकी प्राथमिकताएं भी गिनाई.

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अपने बयान में उन्होंने कहा है कि भारत दूसरे साझेदारों के साथ मिल कर पुराने व नए विवादों को दूर करने की कोशिश करेगा. बातचीत व विमर्श को बढ़ावा देने पर भी भारत का जोर होगा. कई वजहों से अंतरराष्ट्रीय गर्वनेंस की सामान्य प्रक्रिया बाधित हो रही है. जयशंकर ने कहा कि भारत नीति व कानून पर चलने वाला एक लोकतांत्रिक देश है. यूएनएससी में 15 सदस्य होते हैं. पांच स्थायी (चीन, अमेरिका, रूस, ब्रिटेन व फ्रांस) जबकि शेष 10 अस्थायी. भारत के साथ पांच नए देशों को अस्थायी सदस्य के तौर पर चुना जाना है. विकासशील देशों के बीच अपनी दावेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से जयशंकर ने कोविड-19 से उत्पन्न चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे जो हालात पैदा हुए हैं वे बिल्कुल अप्रत्याशित हैं. भारत कोविड-19 से लड़ाई में विकासशील देशों की मदद करेगा.

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आपकी जानकारी के लिए बता दे कि विदेश मंत्री ने एक मसौदा पत्र भी जारी किया है जिसमें भारत की भावी प्राथमिकताओं को पांच एस के तौर पर पेश किया गया है. ये हैं सम्मान, संवाद, सहयोग, शांति व समृद्धि. इसके तहत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ प्रभावशाली अभियान और मौजूदा मल्टीलेटरल सिस्टम को बदलने को प्राथमिकता के तौर पर लेने की बात शामिल है. वही, संयुक्त राष्ट्र जैसी एजेंसियों की तरफ इशारा करते हुए जयशंकर ने कहा है कि, ये विश्व की बदलती हुई वास्तविकता के अनुरूप नहीं है. विश्व शांति के लिए हमें पहले से ज्यादा बातचीत, एक दूसरे के प्रति आदरभाव प्रदर्शित करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति आदर दिखाने की आवश्यकता है. इसके लिए मल्टीलेटरल सिस्टम में बदलाव जरूरी है. जाहिर है कि भारतीय विदेश मंत्री ने कोविड-19 की वजह से अपने चिरपरिचित प्रतिद्वंदी देश चीन पर जिस तरह से पारदर्शी नहीं होने का आरोप लग रहा है, उस तरफ इशारा कर दिया है.

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