आज भी कुँवारी मानी जाती है रामायण और महाभारत काल की यह शादीशुदा स्त्रियां

Feb 23 2019 08:00 PM
आज भी कुँवारी मानी जाती है रामायण और महाभारत काल की यह शादीशुदा स्त्रियां

आप सभी को बता दें कि रामायण और महाभारत काल में कुछ स्त्रियों का ऐसा भी वर्णन किया गया है जिसे सुनने के बाद आपको अपने कानो पर विश्वासनही होगा. जी हाँ, कहते हैं इन सभी स्त्रियों ने विवाहित जीवन भोगा था लेकिन उसके बाद भी इन सभी को कुंवारी माना गया है. जी हाँ, आज हम आपको उन्ही स्त्रियों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने शदीहुडा होकर भी कुंवारा जीवन व्यतीत किया था.

अहिल्या - आप जानते ही होंगे कि अहिल्या गौतम की पत्नी थी और वह अत्यंत सुंदर थी वह इतनी सुंदर थी के इंद्रदेव ने गौतम का रूप लेकर उनके साथ समय बिताया था इस क्रोध में आकर ऋषि गौतम ने पत्थर बनने का श्राप दे दिया लेकिन वह अपने पति ऋषि गौतम के प्रति बहुत ईमानदार थी इस वजह से उन्होंने उनका श्राप स्वीकार कर लिया. उन्होंने पत्थर बनकर गुजारा किया परंतु जब ऋषि का गुस्सा शांत हुआ और उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ तो उन्होंने इस श्राप से छुटकारा पाने का बताया कि वह श्रीराम के चरणो को छू कर मुक्त हो जाएंगी. इसके बाद श्री राम ने उन्हें पवित्र कहा और वह मुक्त हो गई इस कारण से उन्हें कुवारी माना जाता है.

तारा - आप सभी को बता दें कि तारा का जन्म समुद्र मंथन के दौरान हुआ था और तारा सुग्रीव के भाई बाली की पत्नी थी. कहते हैं भगवान विष्णु ने तारा का हाथ बाली को दे दिया था वह इतनी बुद्धिमान थी कि वह प्राणियों की भाषा समझ सकती थी एक बार बाली असुरों से युद्ध करने के लिए चले गए थे और वापस लौटकर नही आए. इस बात से सभी ने उन्हें मरा हुआ समझ लिया और इसके बाद सुग्रीव ने उस राज्य को और तारा को अपने अधीन ले लिया लेकिन एक दिन बाली लौटा आया और उन्होंने वह राज्य ले लिया. कहते हैं सुग्रीव को राज्य से बाहर निकाल दिया जब सुग्रीव श्री राम जी की शरण में चले गए तो तारा समझ गई थी सुग्रीव अकेला नहीं है उसने बाली को समझाने की कोशिश की लेकिन बाली गुस्से में था तो तारा को छोड़कर चले गए. उसके बाद श्री राम जी ने बाली का वध कर दिया लेकिन मरते हुए बाली ने सुग्रीव से कहा तारा के विचार को सम्मान देने के लिए क्योंकि हर पत्नी अपने पति की भलाई चाहती है इस कारण से तारा को हमेशा पवित्र माना जाता है.

मंदोदरी - कहते हैं मंदोदरी अदभुत सोंदर्य वाली स्त्री थी और बहुत बुद्धिमान थे इनका विवाह रावण के साथ हुआ था कहते हैं कि मंदोदरी रावण को सही गलत का राह दिखाती थी लेकिन रावण उस बात को मानता नहीं था रावण की मृत्यु के बाद श्री राम ने विभीषण को मंदोदरी को आश्रय देने के लिए कहा अपने इन गुणों के कारण मंदोदरी कुंवारी मानी जाती है.

द्रौपदी - आप सभी जानते ही हैं कि पांच पतियों की पत्नी होने पर भी द्रौपदी का व्यक्तित्व काफी मजबूत था परन्तु इसके बावजूद उन्हें कुंवारी कन्याओं की श्रेणी में माना जाता है. कहते हैं जीवनभर द्रौपदी ने पांचों पांडवों का हर परिस्थिति में साथ दिया और कभी किसी एक पति के साथ रहने की जिद्द नहीं की और अपने कर्तव्यों का पालन ईमानदारी से निभाने वाली द्रौपदी का स्मरण धर्म ग्रंथों में महापाप को नाश करने वाला माना गया है.

कुंती - इनके बारे में भी आप जानते ही होंगे. कहा जाता है हस्तिनापुर के राजा पांडु की पत्नी कुंती ने शादी से पहले ऋषि दुर्वासा के मंत्र से सूर्य का ध्यान करके पुत्र की प्राप्ती की और शादी के बाद पांडु की मौत के बाद कुंती ने वंश खत्म नहीं हो जाए इसलिए उसी मंत्र का दोबारा इस्तेमाल करके अलग-अलग देवताओं से संतान पाप्ती की, जिसके कारण उन्हें कौमार्या कहा जाता है.

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इस वजह से हवन और यज्ञ के दौरान कहा जाता है 'स्वाहा'

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