पुलवामा शहीदों के परिजनों से ये कैसा व्यव्हार ? न सीएम गहलोत मिल रहे और न गांधी परिवार

पुलवामा शहीदों के परिजनों से ये कैसा व्यव्हार ? न सीएम गहलोत मिल रहे और न गांधी परिवार
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जयपुर: पुलवामा आतंकी हमले में वीरगति को प्राप्त हुए राजस्थान के जवानों की पत्नियां अपनी मांगों को लेकर बीते कई दिनों से धरने पर बैठी हुई हैं। लेकिन, अभी तक उनकी मांगों को लेकर कोई रास्ता निकलता हुआ नज़र नहीं आ रहा है। यहाँ तक कि, राजस्थान की पुलिस तो इन वीरांगनाओं के साथ सही वर्ताव भी नहीं कर रही है। शहीदों की पत्नियों ने आरोप लगाया है कि CM आवास की तरफ जाते समय पुलिस ने उनके साथ मारपीट की थी, जिससे दुखी होकर इन तीनों वीर वधुओं ने गवर्नर से इच्छा मृत्यु की मांग की है. इन सब के बीच एक सवाल जो बार-बार उठ रहा है कि आखिर राजस्थान का CM होने नाते अशोक गहलोत धरने पर बैठी शहीदों की पत्नियों से मिलने क्यों नहीं जा रहे हैं? दरअसल, इन वीर वधुओं की पीड़ा न तो राज्य की कांग्रेस सरकार सुन रही है और न ही बार-बार बुलाने पर गांधी परिवार ही इनसे मिलने पहुँच रहा है।  

बता दें कि, पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए राजस्थान के जवानों की पत्नियों से कांग्रेस सरकार ने कई वादे किए थे, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया। शहीदों की पत्नियां इन्हीं मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहीं हैं। शहीदों की पत्नियों की मांग पर सीएम अशोक गहलोत का कहना है कहा कि वो जो मांग कर रही हैं, वो नियमानुसार सही नहीं है। अशोक गहलोत ने इस मामले में एक ट्वीट करते हुए लिखा कि, 'शहीदों के बच्चों का हक मारकर किसी अन्य रिश्तेदार को नौकरी देना कैसे उचित ठहराया जा सकता है? जब शहीद के बच्चे बालिग होंगे तो उन बच्चों का क्या होगा?  उनका हक मारना उचित है क्या?'  गहलोत ने सवाल उठाया है कि परिवार के बाहर किसी दूसरे व्यक्ति को शहीद के कोटे से नौकरी कैसे दी जा सकती है? उन्होंने कहा कि नियमों के मुताबिक, शहीद की पत्नी को नौकरी मिल सकती है या तो उसके बेटे को। सीएम गहलोत ने कहा कि यदि हम वीरांगनाओं की सभी मांगों को मानते जाएंगे, तो ये सूबे के अन्य शहीदों के नज़रिए से उचित नहीं होगा। गहलोत का दावा है कि शहीदों के लिये किए गए वादों में से अधिकतर पूरे किए जा चुके हैं। कुछ बाकी हैं जो प्रक्रिया में हैं वो भी शीघ्र ही पूरे हो जाएंगे। हालाँकि, गहलोत के इस बयान पर यह सवाल भी उठ रहा है कि, शहीदों के बच्चों को बालिग होने में यदि वर्षों का समय लगता है, तो तब तक उस परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा ? यदि शहीदों की पत्नियां अधिक पढ़ी-लिखी नहीं हैं, तो क्या उनके किसी रिश्तेदार को नौकरी नहीं दी जा सकती, जैसा की वीर वधुएं मांग कर रहीं हैं ?

हालाँकि, मुख्यमंत्री गहलोत के इस ट्वीट के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि शहीदों की पत्नियों द्वारा की जा रही मांग पर कोई हल मिलने की उम्मीद काफी कम है। हालांकि, इस मामले को भाजपा पुरजोर तरीके से उठा रही है। भाजपा सांसद किरोड़ीलाल मीणा का कहना है कि कांग्रेस सरकार के मंत्रियों ने शहीदों के घर जाकर परिजनों से जो वादे किए थे, सरकार उनको पूरा करे। वहीं, इस मामले में गहलोत ने भाजपा पर शहीदों के नाम पर सियासत करने का आरोप लगाया है। गहलोत ने अपने ट्वीट में लिखा कि भाजपा के कुछ नेता अपनी सियासी रोटियां सेंकने के लिए शहीदों की वीरांगनाओं का इस्तेमाल कर उनका तिरस्कार कर रहे हैं। यह कभी भी राजस्थान की परम्परा नहीं रही है। मैं इसकी निंदा करता हूं। हालाँकि, राज्य के पूर्व डिप्टी सीएम और कांग्रेस नेता सचिन पायलट जरूर पुलवामा शहीदों की पत्नियों से मिलने पहुंचे थे। लेकिन, वे सरकार का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए अधिक कुछ कर नहीं सकते और गहलोत से उनकी तकरार भी जगजाहिर है। ऐसे में वीरांगनाओं ने पायलट से गांधी परिवार से मिलवा देने की गुहार लगाई थी, किन्तु अभी तक गाँधी परिवार के किसी भी सदस्य ने इस मामले पर गौर नहीं किया है। इस पूरे मामले में लोगों का कहना है कि राज्य का CM होने के नाते अशोक गहलोत को शहीदों की पत्नियों से बात मिलकर बात करनी चाहिए।  

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