इन्सान कैसा होना चाहिये

इन्सान कैसा होना चाहिये 

"यह सवाल मैंने अलग-अलग इंसानों से पूछा और

जवाब कुछ इस तरह थे 

सब से पहले यह सवाल किया

  • एक महिला से कि

"इन्सान कैसा होना चाहिए"

महिला का जवाब -- खुबसूरत, मुझे देखो सब मुझे पसंद करते है और मुझसे दोस्ती करना चाहते है क्योकि मैं खुबसूरत हूँ। जवाब सुन कर मैंने सोचा -- ज़िन्दगी गुजार दी तन के अहंकार में ।

  •  फिर यह सवाल किया एक व्यापारी से क़ि

"इन्सान को कैसा होना चाहिये"

व्यापारी का जवाब -- धनवान, मुझे देखो सब मुझे पसंद करते है और मेरे जैसा बनना चाहते है क्योकि मैं धनी हूँ ।

जवाब सुन कर मैंने सोचा -- जिंदगी गुजार दी धन के अहंकार में।

  •  फिर यह सवाल किया एक पंडित जी से क़ि

"इन्सान को कैसा होना चाहिये"

पण्डित जी का जवाब -- ज्ञानी, मुझे देखो सब मुझे पसंद करते है और मेरे जितना विद्वान बनना चाहते है क्योकि मैं

ज्ञानी हूँ।

जवाब सुन कर मैंने सोचा -- जिंदगी गुज़ार दी ज्ञान के अहंकार में।

  •  फिर यह सवाल किया एक बच्ची से क़ि

"इन्सान कैसा होना चाहिए"

बच्ची का जवाब : मेरी माँ जैसा क्योकि वो खुद से और सब से ज्यादा प्यार मुझे करती है खुद भूखी सो सकती

है पर मुझे भूखा देख भी नहीं सकती। मेरी माँ को सब बदसूरत निर्धन और अनपढ़ कहते है। फिर भी वो सदैव मुस्कुराते रहती है और मुझसे ज्यादा वो किसी की परवाह नहीं करती खुद की भी नहीं ।

यह जवाब सुन कर मैं कुछ सोच न सका और समझ गया कि ज़िन्दगी माँ के प्यार के बिना अधूरी है ओर शायद इसलिये कहते हैं कि, भगवान हर जगह हमारे लिए नहीं हो सकता तभी उसने दुनिया में माँ बनाई है

दुनिया में किसी को तन का किसी को धन का किसी को ज्ञान का और भी तरह - तरह का गुमान होता हे इन सब पर गुमान करने करने का कोई कारण नहीं होता दुनिया में सबसे अहम प्यार होता हे वो भी "माँ" का इसलिए शायद ही दुनिया में "माँ" जैसा इंसान कोई और दूसरा हे न होगा ।

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