जब होली पर रंग खेल ही लिया जाता है, तो रंग पंचमी का क्या है महत्त्व ?

इंदौर :महाराष्ट्र में होली के त्यौहार के बाद पंचमी के दिन रंग खेलने की परंपरा है। यह रंग पंचमी सामान्य रूप से सूखे गुलाल से खेली जाती है। विशेष भोजन बनाया जाता है जिसमे पूरनपोली जरूर होती है। मछुआरों की बस्ती मे इस त्योहार का मतलब नाच, गाना और मस्ती से निकाला होता है। ये मौसम शादी निर्धारित करने के लिये मुआफिक माना जाता है, क्योंकि सारे मछुआरे इस त्योहार पर एक दूसरे के घरों को मिलने जाते है और काफी समय मस्ती मे बिताते हैं।

राजस्थान में इस मौके पर विशेष रूप से जैसलमेर के मंदिर महल में लोकनृत्यों में डूबा माहौल देखते ही बनता है जब कि हवा में लाला नारंगी और फ़िरोज़ी रंग उड़ाए जाते हैं। मध्यप्रदेश की आर्थिक नगरी माने जाने वाले इंदौर में इस दिन सड़कों पर रंग मिश्रित सुगंधित जल छिड़का जाता है। करीब पूरे मालवा प्रदेश में होली पर जलूस निकालने की परंपरा विद्यमान है। जिसे गेर कहा जाता हैं।

गैर के जलूस में बैंड-बाजे-नाच-गाने सब शामिल होते हैं। नगर निगम के फ़ायर फ़ाइटरों में रंगीन पानी भर कर जुलूस के पूरे रास्ते भर लोगों पर  डाला जाता है। जुलूस में प्रत्येक धर्म के, प्रत्येक राजनीतिक पार्टी के लोग शामिल होते हैं, प्राय: महापौर (मेयर) ही जुलूस की अध्यक्षता करते  हैं। प्राचीनकाल में जब होली का पर्व कई कई दिनों तक मनाया जाता था, उस समय रंगपंचमी होली का अंतिम दिन हुआ करता था और उसके बाद कोई रंग नहीं खेलता था।

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