क्या है मनोभ्रंश से जुड़ीं नई रिसर्च का परिणाम ?

क्या है मनोभ्रंश से जुड़ीं नई रिसर्च का परिणाम ?

एक महत्वपूर्ण शोध में वेस्टचेस्टर काउंटी न्यूयॉर्क में 65 वर्ष या अधिक आयु के 524 लोगों को शामिल किया गया. अध्ययन की शुरुआत में जिन प्रतिभागियों को मनोभ्रंश नहीं था, उन्होंने संज्ञानात्मक, मनोवैज्ञानिक और गतिशीलता परीक्षणों के लिए अल्बर्ट आइंस्टीन कॉलेज ऑफ मेडिसिन के एक अनुसंधान केंद्र का दौरा कराया गया. जहां पर उन्होंने अपने व्यक्तित्व से जुड़ी जानकारी देने के लिए एक प्रश्नावली को पूरा करना था. बता दें कि कुल प्रतिभागियों में से 62 प्रतिशत महिलाएं थीं. अध्ययन की शुरुआत के तीन साल बाद, टीम ने शोध में शामिल में लोगों में पाया कि 38 लोगों में मोटरिक संज्ञानात्मक जोखिम और 69 लोगों में हल्के संज्ञानात्मक हानि के लक्षण नजर आए. 

इस रिसर्च को लेकर शोधकर्ताओं ने लिखा कि "ये निष्कर्ष बुढ़ापे में प्री- डिमेंशिया सिंड्रोम की भविष्यवाणियों के रूप में व्यक्तित्व लक्षणों के प्रारंभिक साक्ष्य प्रदान करती हैं. जो इस संभावना को बढ़ाते हैं कि व्यक्तित्व लक्षण सिंड्रोम के खिलाफ या सुरक्षा के लिए जोखिम में एक स्वतंत्र भूमिका निभाते हैं.

इसके अलावा अल्बर्ट आइंस्टीन कॉलेज ऑफ मेडिसिन के सह-लेखक एमलाइनर्स एयर्स ने एक बयान में कहा कि  "हमें अधिक अध्ययनों की आवश्यकता है, हमारे परिणाम इस बात का सबूत देते हैं कि व्यक्तित्व लक्षण सिंड्रोम के खिलाफ जोखिम या सुरक्षा के लिए एक स्वतंत्र भूमिका निभाते हैं. बढ़ती उम्र के साथ जहां एक व्यक्ति को अनुभूति के साथ छोटी मोटी कई समस्याएं होती हैं जो एक स्वस्थ व्यक्ति के मुकाबले उम्रदराज व्यक्ति में कही अधिक होती है. लेकिन इस समस्या को गंभीर रूप से मनोभ्रंश मानकर  परिभाषित नहीं किया जा सकता है.

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