विजयदशमी मनाने के पीछे क्या है कारण? जानें इस खबर से

हिन्दू धर्मे में नवरात्री का त्यौहार बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाता है नवरात्रि का त्यौहार साल में दो बार आता है पहला नवरात्रि त्यौहार चैत्र मास में और दूसरा नवरात्रि अश्विन मास में आता है, अश्विन मास में जो नवरात्री का त्यौहार आता है उसे हिन्दू धर्म के लोग बड़ी ही धूम धाम से मानाते है इस त्यौहार में पूरे नौ दिन तक माता के अलग अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है भक्त लोग माता का पंडाल बनाकर उसमे माता की मूर्ति स्थापित करते है और नौ दिनों तक उनकी पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करते है कुछ भक्त गण माताओं के दर्शन के लिए धार्मिक स्थल पर भी जाते है, क्या आपको पता है की नवरात्रि का त्यौहार और दशवें दिन, विजयादशमी क्यों मनायी जाती है और इसे मनाने का कारण क्या है?
 
पहली कथा इस प्रकार है- प्राचीन काल में जब महिषासुर नामक राक्षस तपस्या कर रहा था तो उसकी तपस्या से खुश होकर देवताओं ने उसे अजेय होने का वरदान दिया था, वरदान प्राप्त करने के बाद महिषा सुर और ज्यादा हिंसक हो गया था उसने अपना आतंक इतना ज्यादा फैला रखा था की सारे देवतागण उसके भय के कारण देवीदुर्गा की आराधना करने लगे, ऐसा माना जाता है की देवी दुर्गा के निर्माण होने में देवताओं का सहयोग था महिषा सुर के आतंक से बचने के लिए देवताओं ने अपने अस्त्र शस्त्र देवी दुर्गा को दिए थे तब जाकर देवी दुर्गा और शक्तिशाली हो गयी थी, इसके बाद महिषा सुर को समाप्त करने के लिए देवी दुर्गा ने  महिषा सुर के साथ पूरे 9 दिन युद्ध की थी और महिषा सुर का वध करने के बाद देवी दुर्गा महिषासुर मर्दिनी कहलाई. तभी से नवरात्रि का त्यौहार मनाया जाता है.
 
दूसरी कथा- विजयादशमी की पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान राम को जब आयोद्धा छोड़कर 14 वर्ष के लिए वनवास जाना पड़ा था और उसी वनवास काल के दौरान रावण ने सीता का हरण कर लिया था तब भगवान राम सीता माता को वापस लाने के लिए नौ देवियों की पूजा की थी और पूजा से प्रसन्न होकर देवी दुर्गा ने श्री राम भगवान को वरदान दिया था और कई शक्तियां भी प्रदान की थी वरदान प्राप्त करने के बाद दशमे दिन भगवान श्री राम और रावण का युद्ध हुआ और इसी युद्ध में रावण का वद्ध हुआ था और तभी से राम नवमी और विजयादशमी का त्यौहार मनाया जाता है.

 

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