हमें आजादी कब मिलेगी

Oct 09 2015 05:27 AM
हमें आजादी कब मिलेगी

सयानी होती बेटिया, क्यों करता है भारतीय समाज अपनी बेटियों की इतनी परवाह...

एक संत की कथा में एक बालिका खड़ी हो गई। चेहरे पर झलकता अत्यधिक आक्रोश !! संत ने पूछा बोलो बेटी क्या बात है! बालिका ने कहा- महाराज हमारे समाज में लड़कों को हर प्रकार की आजादी होती है। वह कुछ भी करे, कहीं भी जाए उस पर कोई खास टोका टाकी नहीं होती। इसके विपरीत लड़कियों को बात बात पर टोका जाता है। यह मत करो, यहाँ मत जाओ, घर जल्दी आ जाओ आदि। 

संत मुस्कुराए और कहा बेटी तुमने कभी किसी लोहे की दुकान के बाहर पड़े लोहे के गार्डर देखे हैं? ये गार्डर सर्दी, गर्मी, बरसात, रात दिन इसी प्रकार उस दुकान में पड़े रहते हैं। इसके बावजूद इनका कुछ नहीं बिगड़ता और न ही इनकी कीमत पर भी कोई अन्तर पड़ता है । लड़कों के लिए कुछ इसी प्रकार की सोच है हमारे भारतीय समाज में। 

अच्छा अब तुम एक ज्वेलरी शॉप में चलो। वहां एक बड़ी तिजोरी, उसमें एक छोटी तिजोरी। और उसमें रखी छोटी सुन्दर सी डिब्बी में रेशम पर नज़ाकत से रखा चमचमाता हीरा। क्योंकि जौहरी जानता है कि अगर हीरे में जरा भी खरोंच आ गई तो उसकी कोई भी कीमत नहीं रहेगी। एक ही पल में वह नायाब हीरे से कांच का एक साधारण टुकड़ा बन जायेगा । 

इसलिए बेटी हमारे समाज में भी बेटियों की अहमियत कुछ इसी प्रकार की होती है। वो पूरे घर को रोशन करती हे एक झिलमिलाते हीरे की तरह। पर एक जरा सी भी खरोंच से उसके और उसके परिवार के पास कुछ नहीं बचता। बस यही अन्तर है लड़कियों और लड़कों में। पूरी सभा में चुप्पी छा गई। उस बेटी के साथ पूरी सभा में मौजूद सभी की आँखों में छाई नमी साफ-साफ बता रही थी एक लोहे और एक हीरे में फर्क ।