विश्‍वकर्मा जयंती पर जरूर करें यह आरती

भगवान विश्‍वकर्मा की जयंती यानी विश्वकर्मा पूजा इस बार 17 सितंबर को है। ऐसे में आप सभी जानते ही होंगे कि हर साल कन्‍या संक्रांति के दिन विश्वकर्मा पूजा होती है। जी दरअसल ऐसी मान्यता है कि यही वह दिन है जब भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। जी दरअसल भगवान विश्वकर्मा का जिक्र 12 आदित्यों और लोकपालों के साथ ऋग्वेद में होता है। वहीं विश्‍वकर्मा पूजा के दिन विशेष तौर पर औजारों, निर्माण कार्य से जुड़ी मशीनों, कारखानों, फैक्ट्री में पूजा की जाती है। आप सभी को बता दें कि इस बार विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त 17 सितंबर, शुक्रवार को सुबह 6:07 बजे से 18 सितंबर, शनिवार को 3:36 बजे तक रहने वाला है। वहीं 17 सितंबर को राहुकाल सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक है। अब हम आपको बताते हैं श्री विश्वकर्मा आरती जिसके बिना विश्वकर्मा पूजा अधूरी मानी जाती है।

श्री विश्वकर्मा आरती-


ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।

सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥1॥

 

आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।

शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥2॥

 

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई।

ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥3॥

 

रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।

संकट मोचन बनकर, दूर दुख कीना॥4॥

 

जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी।

सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी॥5॥

 

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।

द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे॥6॥

 

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।

मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे॥7॥

 

श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे।

कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥8॥

आयुष को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करना स्वागत करने योग्य: डॉ स्वामी संदीप

कोयला चोरी मामले को लेकर इन राज्यों में जांच कर रही है CBI

दूसरे दिन भी सोनू सूद के घर जारी इनकम टैक्स की रेड, CM ने जताई नाराजगी

- Sponsored Advert -

Most Popular

- Sponsored Advert -