जब सरकार ने नहीं की मदद तो ग्रामीणों ने खुद ही बनाये दो अस्थाई पुल

Sep 15 2018 01:38 PM
जब सरकार ने नहीं की मदद तो ग्रामीणों ने खुद ही बनाये दो अस्थाई पुल

चमोली : उत्तराखंड में भीषण बाढ़ के कारण हालात ख़राब हो चुके हैं जिसके कारण ग्रामीण खुद की ही मदद कर रहे हैं. सीमांत चमोली जिले के कुछ ऐसे ही दुरुस्त क्षेत्र में बारिश ने मुसीबतें बढ़ा दी हैं जिसके कारण सरकार भी कुछ मददगार साबित नहीं हो रही है. बारिश के कारण उर्गम घाटी में आरोसी पिलखी क्षेत्र के कई गांवों में आने जाने के लिए कल्प गंगा पर एक पैदल पुल था जो बारिश के कारण बह गया लेकिन सरकार ने दो महीने तक इसकी कोई खबर नहीं ली जिसके कारण गांव वालों को ही अपनी सुविधा के लिए पुल बनाना पड़ा. 

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जी हाँ, गांव वालों ने चार दिन में दो अस्थाई पुल का निर्माण किया है जिसके कारण वो गाँव में आवाजाही कर सकते हैं. आपको याद दिला दें, उर्गम घाटी में कल्प गंगा पर बने स्थायी पुल 2013 में आई बाढ़ में बह गए थे जिसके बाद लोग कल्प गंगा पर पावर हाउस के पास बने अस्थायी पुलों से आने जाने का काम कर रहे थे लेकिन हाल ही में हुई बारिश के कारण वो पुल भी नष्ट हो गए.  इस बीच ग्रामीणों ने कई बार जोशीमठ तहसील प्रशासन को भी इस संबंध में सूचना दी, लेकिन उन्हें वहां से कोई भी जवाब नहीं मिला जिसके कारण ये कदम उन्हें ही उठाया पड़ा. 

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पहले ये पुल कच्चे बनाये थे लेकिन परेशानी ये आ रही थी कि उस पुल से घोड़े और खच्चर नहीं गुज़र पा रहे थे इसलिए ग्रामीणों ने पावर हाउस के फागड़ा तोक में घोड़ा-खच्चर के लिए भी सुरक्षित कच्चा पुल तैयार कर लिया. दोनों पुलों के निर्माण को प्रत्येक परिवार से एक-एक व्यक्ति श्रमदान में शामिल हुआ. 

इस पर आरोसी गांव के ग्रामीण रघुवीर सिंह चौहान का कहना है कि प्रशासन शायद कल्प गंगा में पानी कम होने का इंतजार कर रहा है. ग्रामीणों के पास खाद्य सामाग्री की कमी थी जिसके चलते उन्होंने जो संसाधन उपलब्ध थे उसी से इस पुल का निर्माण किया जिससे उन्होंने सरकार को ये आईना दिखाया है.  

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