चीन ने विवादित सागर में किया उड़ान परीक्षण, वियतनाम भड़का

Jan 04 2016 03:58 PM
चीन ने विवादित सागर में किया उड़ान परीक्षण, वियतनाम भड़का

बीजिंग : दक्षिणी चीन सागर को हथियाने के मकसद से चीन द्वारा बनाए जा रहे कृत्रिम द्वीप पर चीन ने पहली बार एक विमान उतारा है। इसके बाद वियतनाम ने बीजिंग पर उसकी संप्रभुता का घोर उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। इस पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि चीन ने इस उड़ान का परीक्षण इसलिए किया है ताकि यह जांचा जा सके कि हवाई पट्टी नागरिक विमानन के मानदंडों को पूरा करती है या नही।

हुआ का कहना है कि उड़ान परीक्षण असैन्य प्रकृति का था। यह गतिविधि पूरी तरह से चीन के संप्रभुता के दायरे में हुई है। हुआ ने कहा कि चीन की नानशा द्वीपों और इस जुड़े जल क्षत्रों पर अविवादित संप्रभुता है। वियतनाम के बेबुनियाद आरोपों को चीन स्वीकार नही करेगा। दरअसल दक्षिणी चीन सागर प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न है। साथ ही यह एक बड़ा जहाजरानी मार्ग भी है।

दुनिया के आधे से अधिक जहाज हिंद-प्रशांत जलमार्ग से होकर गुजरते हैं। इनमें दुनिया के तरल प्राकृतिक गैस का एक तिहाई हिस्सा भी शामिल है। चीन लगभग समूचे दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है जिसके चलते वियतनाम और फिलीपींस, मलेशिया तथा ब्रुनेई जैसे कुछ अन्य देशों के साथ उसकी तकरार चल रही है। उनका आरोप है कि चीन विवादित क्षेत्र में अवैध रूप से भूमि पर दावा कर रहा है ताकि वह सुविधाओं से युक्त कृत्रिम द्वीप बनाकर उनका इस्तेमाल संभवत: सैन्य इस्तेमाल के लिए कर सके।

वियतनाम के विदेश मंत्रालय का कहना है कि उनके हिस्से में पड़ने वाली स्पार्ट ले द्वीप के एक हिस्से में अवैध रुप सले हवाई पट्टी बनाई गई है। इस संबंध में वियतनाम ने चीन को एक विरोध नोट भी सौंपा है। इस नोच में बीजिंग से कहा गया है कि इस तरह के कार्यों को दोहराया न जाए। दूसरी ओर अमेरिका का कहना है कि यह चिंता की बात है कि शनिवार की उड़ान ने तनाव बढ़ा दिया है।

अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता पूजा झुनझुनवाला के हवाले से बीबीसी ने बताया कि दावेदारों के लिए इस बात की अत्यधिक जरूरत है कि वे और अधिक भूमि कब्जाने को रोकने, नयी सुविधाओं का निर्माण करने और विवादित स्थलों के सैन्यीकरण को रोकने का सार्वजनिक वादा करे।