अब तक 11 बार हुआ सांसदों का निलंबन, सभी सरकारें अलोकतांत्रिक थीं ?- विपक्ष के प्रपंच पर नायडू ने घेरा

नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही उच्च सदन के 12 सदस्यों को जोरदार हंगामा और अफरा-तफरी मचाने की वजह से निलंबित कर दिया गया था। विपक्ष इस बात का संसद से लेकर सड़क तक विरोध कर रहा है। विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने गुरुवार को भी सांसदों के निलंबन के विरोध में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष काली पट्टी बांधकर विरोध जताया, जिसपर उच्च सदन के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने नाराजगी जाहिर की है।

एम. वेंकैया नायडू ने विपक्षी पार्टियों के विरोध प्रदर्शन पर कहा कि ये पहली दफा नहीं है, जब सदन में सांसदों के निलंबन की घटना हुई हो। उन्होंने कहा कि 1962 से 2010 तक 11 बार ऐसे अवसर आए हैं, जब सदस्यों को सस्पेंड किया गया है। क्या वे सभी सरकारें अलोकतांत्रिक थी? नायडू ने कहा कि सदन के कुछ सम्मानित नेताओं और सदस्यों ने अपने विवेक से 12 सदस्यों के निलंबन को ‘अलोकतांत्रिक’ करार दिया है। मैं यह समझने की कोशिश करता रहा कि सदन में जो कुछ हंगामा हुआ, क्या उसका कोई मतलब था? उन्होंने कहा कि इस निलंबन को ‘अलोकतांत्रिक’ बताने वाले एक बार भी उस निलंबन की वजह के बारे में बात नहीं कर रहे हैं।

नायडू ने आगे कहा कि, 'आप अपने किए का पछतावा नहीं करना चाहते हैं, मगर सदन के नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रिया के मुताबिक, इस सदन के फैसले को निरस्त करने की बात कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि, 'उपसभापति ने दोनों पक्षों से इस पर बात करने और सदन के सामान्य कार्यवाही को आगे बढ़ने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है। मैं इस सम्मानित सदन के दोनों पक्षों से इस पर बात करने और सदन को अपना अनिवार्य काम करने देने की अपील करता हूं।”

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