15 हज़ार नहीं चुका पाई पत्नी, तो अस्पताल ने 75 दिन कब्ज़े में रखा 'कोरोना संक्रमित' पति का शव

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ में कोरोना का प्रकोप अभी भी देखने को मिल रहा है. ताजा मामला हापुड़ के सिटी कोतवाली क्षेत्र से सामने आया है, जहां पर 15 हजार रुपये न होने पर कोरोना संक्रमित व्यक्ति के शव का लगभग ढाई माह बाद गुरुवार को अंतिम संस्कार किया गया. मृतक युवक अप्रैल माह में कोरोना संक्रमित पाया गया था, जिसे उपचार के दौरान मेरठ रेफर कर दिया गया था. मेरठ में इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई थी.

उस दौरान शख्स की पत्नी से अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा कहा गया कि अंतिम संस्कार के लिए शव देने के 15 हजार रुपये लगेंगे, तभी शव दिया जाएगा, वरना हम लोग ही शव का अंतिम संस्कार कर देंगे. इसके बाद पत्नी पैसे का प्रबंध करने हापुड़ आ गई, लेकिन उससे शव के लिए 15 हजार रुपये का प्रबंध नहीं हो पाया और वह अस्पताल द्वारा अंतिम संस्कार करने की बात सोचकर शव लेने नहीं गई और हापुड़ से अपने दो बच्चो को लेकर अपने गांव चली गई. अब लगभग ढाई महीने बाद अस्पताल को शव की सुध आई. अस्पताल द्वारा शव को परिवार वालों के इंतजार में रखा हुआ था. 

जब ढाई माह बाद भी कोई शव लेने नहीं आया, तो मेरठ अस्पताल ने शव को हापुड़ स्वास्थ्य विभाग के हवाले कर दिया और हापुड़ स्वास्थ्य विभाग ने तीन दिन पहले शव को जीएस मेडिकल कॉलेज में रखवा दिया. उसके बाद प्रशासन के सहयोग से परिवार वालों को ढूंढने लगे. गुरुवार को जब परिजनों का पता चला तो उन्हें शव सौंप दिया गया और NGO के माध्यम से शव का अंतिम संस्कार करा दिया गया. किन्तु जब मृतक के मासूम बच्चे और पत्नी श्मशान पर अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे, तो उनके आंसू नहीं थम रहे थे. बता दें कि, अस्पताल कोरोना से मृतक का शव अधिक दिनों तक नहीं रखा जाता, किन्तु इस मामले ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है.

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