1990 से हर गर्मी में अनजान बीमारी लेती है बिहार में बच्चों की जान

मुजफ्फरपुर : बिहार के मुजफ्फरपुर क्षेत्र में हर साल गर्मियों में एक अज्ञात बीमारी से कई बच्चों की जान जा रही है. शुरुआत में बस बुखार फिर बच्चे बेसुध और चिकित्सा के पहले ही जान निकले का सिलसिला चल पड़ता है. केंद्र व राज्य सरकार के स्तर पर पुणे और दिल्ली के अलावा अमेरिका के अटलांटा में पीडि़त बच्चों के खून व नमूनों की जांच कराई गई, मगर बीमारी के कारणों, वायरस या सूक्ष्मजीवी जैसे कोई सबूत नहीं मिले. बारिश शुरू होते ही बीमारी खुद-ब-खुद गायब हो जाती है.


इस बीमारी से साल 2012 में 120 मौतें हुईं थीं. इस साल भी गर्मी के आने के साथ सिलसिला शुरू हो चूका है अब तक एक मौत हो चुकी है. 1990 से शुरू ये सिलसिला फ़िलहाल जारी है. स्थानीय अस्पताल में शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ब्रजमोहन कहते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देश पर इलाज का प्रोटोकॉल बना. हालांकि पीडि़त बच्चों में हाइपोग्लाइसेमिया के लक्षण मिलने से अब ग्लूकोज व सोडियम की मात्रा नियंत्रित करने पर काम हो रहा है.

डॉ ब्रजमोहन ने बताया कि कुछ बच्चों में हाइपोग्लाइसेमिया पाया जा रहा है, जिसमें शरीर में शुगर का लेवल कम हो जाता है, लेकिन अब तक किसी भी पीडि़त में इंसेफेलाइटिस का वायरस नहीं मिला. बहरहाल, अप्रैल से जून माह में होने वाली यह बीमारी अब भी अज्ञात बनी हुई है. अब तक किये गए करोड़ों के सरकारी इंतजामात नाकाफ़ी रहे है .

 

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