उज्जैन: आगंतुकों के इंतजार में सजकर तैयार हुई प्रतिकल्पा

एक बार फिर मध्यप्रदेश के धार्मिक पर्यटन नगर उज्जैन में आस्था का सैलाब उमड़ेगा। इस दौरान श्रद्धालु अमृत बूंदों का आनंद लेंगे और स्नान कर स्वयं को पवित्र कर लेंगे। श्रद्धा की डुबकी लगाने के साथ शिप्रा के तट पर अमृत का मेला लगेगा। आखिर यह आयोजन हमारी सनातनी परंपरा को बता रहा है। धरती के करीब 75 प्रतिशत भाग पर जल विद्यमान है। यह जल जीवनदायी है। हमारे वेदों में दिया गया है कि जल वह अमृत हो जो हर तत्व को शुद्ध कर लेता है।

वर्तमान में जब देश के कई क्षेत्रों में सूखे की स्थिति है और दूसरी ओर ठंडे स्थलों पर पर्यावरणीय हलचलों के कारण ग्लेशियर पर जमा बर्फ रूपी जल तेजी से पिघल रहा है। ऐसे में जल का महत्व वर्णित करने की आवश्यकता नहीं है। बहरहाल मध्यप्रदेश के इस धार्मिक नगर पर पिछले दिनों प्राकृतिक आपदा ने कहर बरपाया। साधु - संतों और पर्यटकों के लिए यह नगरी अपने वंदनवार सजाकर स्वागत के लिए खड़ी थी।

उस नगरी में तेज आंधी और बारिश ने कुछ ही पलों में पांडालों को ढहाकर रख दिया लेकिन संतों की साधनाओं, लोगों के सहयोग और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की उमंग ने फिर से सबकुछ व्यवस्थित कर दिया और अब फिर से नगरी अपने राजा श्री महाकालेश्वर का आशीर्वाद लेकर शिप्रा नदी के किनारे होने वाले दूसरे शाही स्नान के लिए सजकर तैयार हो गई है।

सड़कें साधु - संतों और यहां आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत में सज गई हैं। वह नगरी जो पौराणिक काल से ही समृद्धशाली रही है। उसमें आज फिर पर्यटक उमड़ने लगे हैं। पर्यटकों का उत्साह देखकर भी ऐसा लग रहा है जैसे कुछ हुआ ही न हो। सारा नगर वैदिक और आधुनिक तौर पर सजकर आगंतुकों के स्वागत में तैयार है। आखिर यही तो भारत की परंपरा है। भारतीय अभाव में, दुख में रहकर भी खुश रहना जानते हैं। 

'लव गडकरी'

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