कानूनी सुरक्षा गंवाने पर आया रविशंकर का बयान, कहा- "ट्विटर ने जानबूझकर आईटी कानूनों की अवहेलना की..."

कानूनी सुरक्षा गंवाने पर आया रविशंकर का बयान, कहा-

नए IT नियमों का पालन नहीं करना ट्विटर को झेलना पड़ गया है। ट्विटर ने इंडिया में मिला कानूनी सुरक्षा का आधार गंवा दिया है। इस पर केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को बोला कि ट्विटर को भारत में मिले कानूनी संरक्षण को लेकर कई प्रश्न उठ रहे हैं। उन्होंने बोला यह स्पष्ट है कि ट्विटर ने 25 मई से लागू हुए नए IT नियमों का पालन करने से मना कर दिया। उसने कई मौके मिलने के बावजूद जानबूझकर इनका पालन ना करने का रास्ता चुना। इसके बाद यह जांच की गई है। 


IT एवं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने KOO पर सिलसिलेवार पोस्ट कर कहा कि ट्विटर को इन नियमों का पालन करने के लिए कई मौके दिए जाने वाले है, लेकिन उसने जानबूझकर इन नियमों की अवहेलना का रास्ता चुन लिया। उन्होंने बोला कि भारत की संस्कृति उसकी विशाल भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से बदलती रहने वाली है। इन हालातों में सोशल मीडिया का व्यापक प्रभाव पड़ता है।

IT एवं कानून मंत्री ने कहा कि एक छोटी से चिंगारी बड़ी आग में तब्दील हो सकती है खासकर फेक न्यूज के केस में। IT मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बोला कि आश्चर्यजनक है कि स्वयं को स्वतंत्र अभिव्यक्ति के ध्वजवाहक के रूप में पेश करने वाला ट्विटर खुद नियमों की अवहेलना कर रहा है।

मैनुपलेट नीति का इस्तेमाल ट्विटर ने अपनी सुविधानुसार किया: जंहा इस बारें में उन्होंने बोला, हैरान कर देने वाली बात यह है कि ट्विटर भारतीय कानूनों के अनुसार, शिकायत निवारण तंत्र स्थापित कर अपने यूजर्स की शिकायतों का समाधान करने में पूरी तरह से फ़ैल हो गया है। जिसके बजाय उसने मैनुपलेट मीडिया की नीति का अनुसरण कर दिया गया है, लेकिन उसने इस टैगिंग का इस्तेमाल भी अपनी सुविधानुसार किया। जब उसे अच्छा लगा तो मैनुपलेटेड टैग लगा दिया और जब नापसंद रहा तो ऐसा नहीं किया। प्रसाद ने बोला कि जो कुछ भी हाल ही में उत्तर प्रदेश में घटित हुआ, वो ट्विटर की फेक न्यूज के खिलाफ अतार्किकता को दर्शाता है।

बोले- भारतीय कंपनियां जहां व्यापार करती हैं, वहां कानून मानती हैं: जंहा इस बात का पता चला है कि ट्विटर एक ओर अपनी फैक्ट चेक सिस्टम को लेकर उतावला हुआ है , लेकिन वह यूपी के गाजियाबाद में एक मुस्लिम बुजुर्ग की दाढ़ी काटे जाने जैसी परेशान करने वाली खबरों के केस में त्वरित कार्रवाई करने में असफल रहा।  उसने भ्रामक सूचना को रोकने की कोई भी कोशिश नहीं की। प्रसाद ने कहा कि भारतीय कंपनियां, चाहे आईटी, फार्मा या अन्य क्षेत्र की हों, वो जब अमेरिका या अन्य देशों में कारोबार करने जाती हैं तो वहां के स्थानीय कानूनों का पालन करती हैं।

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